शरणाथियों को वापस लौटना होगा दलाई लामा का दो टूक बयान

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मालमो =तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने स्वीडन में यूरोप में रह रहे शरणार्थियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की। तिब्बत से आकर भारत में शरण लेनेवाले दलाई लामा ने दो टूक अंदाज में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि यूरोप यूरोपियन के लिए है और शरणार्थियों को एक दिन यहां से लौटना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देशों की इन शरणार्थियों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी बनती है।
स्वीडन के तीसरे बड़े शहर मालमो में बौद्ध धर्मगुरु ने यह बात एएफपी को दिए इंटरव्यू में कही। मालमो स्वीडन का तीसरा सबसे बड़ा शहर हैं और यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम मुल्कों के प्रवासियों ने शरण ले रखी है। स्वीडन में बड़ी संख्या में प्रवासियों ने शरण ले रखी है और इस बार के चुनावों में यह वहां एक बड़ा मुद्दा था। स्वीडन के आम चुनावों में स्वीडन डेमोक्रैटिक पार्टी जो प्रवासियों के लिए उदार रुख रखती है सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, प्रवासियों का जमकर विरोध करनेवाली धुर दक्षिणपंथी पार्टी ने भी मजबूती हासिल की और तीसरे स्थान पर रही।
दलाई लामा ने कहा, ‘सभी यूरोपीय देशों की जिम्मेदारी है कि वह अपने यहां आए शरणार्थियों की मदद करे। अपने देश में जान और सुरक्षा के खतरे से जूझ रहे लोगों को शरण देना, शिक्षा देना और बेहतर नागरिक बनाना जिम्मेदारी है। हालांकि, शरणार्थियों को भी समझना चाहिए कि उन्हें एक दिन अपने देश लौटना होगा। प्रवासियों को यह स्वीकार करना ही होगा कि उन्हें वापस अपने देश जाकर उसे फिर से बसाना है।’
1959 से भारत में शरण लेकर रह रहे तिब्बती धर्मगुरु ने कहा, ‘इस पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि यूरोप पर पहला अधिकार यहां के नागरिकों का है। जर्मनी पहले जर्मन लोगों के लिए ही है और उसे कोई अरब मुल्क नहीं बना सकते।’ बता दें कि 2016 में भी उन्होंने यूरोप में रह रहे प्रवासियों के लिए कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया दी थी।