शिव के राज में बेखौफ होता रेत माफिया

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सी. एन दुबे

मध्यप्रदेश .में रेत माफिया कितना सशक्त, बेख़ौफ़ और बेरहम हो गया है उसकी ताजा मिसाल है कि उसने कल मुरैना में एक डिप्टी रेंजर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी।पहले भी एक आईपीएस सहित कई अन्य अधिकारियों की भी ये बेख़ौफ़ हत्या कर चुके हैं।अकेले चम्बल में नही वरन छतरपुर, कटनी,जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद में इनका जबरदस्त आतंक और भय है न केवल इन्होंने अकूत संपत्ति अर्जित कर ली वल्कि अब राजनैतिक ताकत और राजसत्ता के भी मालिक है, उनके सामने उनके राजनैतिक दल भी असहाय है। आज रेत के इस खेल के बारे में एक छोटी सी चर्चा कर लेते हैं।
भूमाफिया, कोयला माफिया तथा अन्य अवैध उत्खनन माफियाओं की तरह रेत माफिया भी दबंग आसामाजिक तत्व,राजनेता का प्रश्रय या स्वयम राजनेता,तथा भ्रष्ट अधिकारियों की सहभागिता से अस्तित्व में आता है।एक बार जब इन सभी मे सहमति बन जाती है तब समाज,कानून ,सत्ता सब से बेख़ौफ़ हो जाते है।मध्यप्रदेश में ये रेत माफिया पिछले 10 सालों में बेहद ताकतवर हो गया है जिसकी ये परिणीति और दुष्परिणाम अब स्पष्ट दिख रहा है।समाज ,राजनैतिक दल,कानून,राजसत्ता सब बेहद असहाय लग रहे हैं।इन्होंने मां नर्मदा जैसी पवित्र नदी को भी नही बख्शा ।
पहले तो इन्होंने नाम के लिए रेत की खदान की परमिशन ली,फिर स्वीकृत खदानों से कई गुना अवैध खदानों से रेत निकालना शुरू किया ,पहले किनारों से रेत निकाली, फिर नदी से नावों से रेत निकाली, फिर मोटर बोटों से रेत निकाली, फिर बीच नदी तक सड़क बनाकर प्रवाह रोककर रेत निकाली, मां नर्मदा को जगह जगह से खोदकर गड्ढों में तब्दील कर दिया गया,आजु बाजू का पर्यावरण नष्ट कर दिया यह तक कि अवैध खदानों के पहुंचने के लिए गरीब किसानों के खेतों में सड़क बना दी गई।बरही से होशंगावाद तक हजारो ट्रक रेत रोज बिना रॉयल्टी शहरों तक बेरौक टोक बेची जाती रही।जो एक ट्रक रेत पहले चार पांच हजार में मिलती थी उसकी कीमत तीस हजार तृक कर दी गयी।कानून अंधा बना रहा,प्रशासन मूक बना रहा जनता बेबस लाचार महंगी कीमत पर खरीदने मजबूर रही।कोई रॉयल्टी नही,कोई रसीद नही,सब कुछ बेख़ौफ़ ।माफिया करोड़पति बन गए।कुछ राजनैतिक दल में रसूखदार हो गए और कुछ सत्ता के भागीदार।
रेत माफिया सड़को पर अपने बेरियर लगाकर गुंडा टेक्स बसूलते रहे।आपसी झगड़ो मारपीट और हत्याएं हुई।अनेक कर्तव्य निष्ट अधिकारियों को इन माफियाओं ने मौत के घाट उतार दिया,जिनमें एक आईपीएस अधिकारी भी शामिल है।
प्रशासन जो कार्यवाही करती है वह नाममात्र की और प्रभावहीन रहती है।जैसे जबलपुर में 5000 हजार डंपर रेत पकड़ी गई।किन्तु न तो रेत निकालने के साधन,न ढोने वाले ट्रक,न निकालने वाले रेत माफिया कोई भी नही पकड़े गए।रेत का ऑक्सन करने की कोशिश की गई लेकिन माफियो के आतंक से किसी ने रेत नही खरीदी।अब पता चला है कि चूंकि बिना रॉयल्टी ट्रक वाले तैयार नही थे तो अब अवैध रेत कैसे बेचे ।स्वयं ही सांठगांठ कर पहले रेत जप्त करवाकर उसे बैध बनवाया,अब माइनिंग से रॉयल्टी लाओ, माफिया को पैसा दो फिर रेत ले जाओ।है न दिमाग का खेल,तो तुम डाल डाल हम पात पात।
अवैध रेत उत्खनन के इस चिंतनीय खेल में सबसे गंभीर बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह पर उनके रिस्तेदारो की भागीदारी का आरोप कई बार लगा चुके हैं ।शिवराजसिंह इस संबंध में सीधा उत्तर न देकर नक्सलवादी ,देशद्रोही का आरोप लगाते है।जो सीधी चुनोती स्वीकार करने से बचने जैसा है।पिछले पंद्रह सालो से उन्ही का प्रशासन है तो इस अवैध रेत उत्खनन की जिम्मेदारी से उनका बचना संभव नही लगता।आओ हम सभी कर्तव्य की वेदी पर अपना प्राणोत्सर्ग करने वाले शहीद डिप्टी रेंजर दिवंगत सूबेदार सिंह कुशवाहा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करे ,ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों मे स्थान देवे और परिवार को इस गहन शोक सहन करने की शक्ति प्रदान करे।ओउम शांति,शांति।
लेखक सेवा निवृत पुलिस अधिकारी है
फोटो प्रतीकात्मक है