राफ़ेल विमान सौदे से मोदी की साख पर आँच…….

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.ज़हीर अंसारी

राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदा केंद्र की भाजपा सरकार के लिए गले की फाँस बनता जा रहा है। लगता है सरकार की स्थिति साँप के मुँह में छछून्दर वाली बन गई है। न उगलते बन रहा है और न निगलते। सरकार की इस दयनीय हालत पर कांग्रेस लगातार प्रहार करती आ रही है, अब उनके अपनों ने भी तलवार भांजनी शुरू कर दी है। कमाल की बात यह इस मुद्दे पर भाजपा के धुर विरोधी प्रशांत भूषण भी भाजपा नेताओं को टेका लगा रहे हैं।

अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अकेले राफ़ेल लड़ाकू विमान को लेकर मोदी सरकार पर धावा बोलते रहे मगर उनकी आवाज़ नक्कारखाने में तूती की तरह दबती रही या गोदी मीडिया दबाती रही। मोदी सरकार सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर स्पष्टीकरण देने से बचती आ रही है। राहुल के आरोपों को ‘पप्पू’ आरोप क़रार देकर देश को बरगलाने में सरकार किसी हद तक कामयाब रही। मगर अब भाजपा के दो सीनियर लीडर यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने मोदी सरकार पर राफ़ेल लड़ाकू विमान को लेकर हमला बोल दिया है। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी खुलकर खड़े हो गए। प्रशांत भूषण ने तो यहाँ तक कह दिया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रिमनल मिसकंडक्ट (आपराधिक दुराचार) का मामला बनता है। कांग्रेस के साथ-साथ इन्हें भी आश्चर्य है कि यूपीए सरकार के वक़्त फ़्रांस की डास्सो एवीएशन कम्पनी जो राफ़ेल लड़ाकू विमान बनाती है, 550 करोड़ रुपए में एक विमान देने तैयार थी फिर क्या वजह पैदा हुई मोदी सरकार इसी विमान को 16 सौ करोड़ रुपए में ख़रीदने सौदा कर लिया। बात यहीं ख़त्म नहीं होती बल्कि शंका-कुशंका यहाँ से शुरू होती है। बक़ौल प्रशांत भूषण राफेल विमान की खरीद की बातचीत की प्रक्रिया में कई साल तक पब्लिक सेक्टर की कंपनी हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड शामिल होती रही है, 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री के डील साइन करने के 16 दिन पहले डास्सो एविशन जो राफेल बनाती है, उसके सीईओ के बयान के अनुसार हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड कंपनी से बातचीत हो रही है, मार्च 2014 में दोनों के बीच एक करार भी हुआ था कि भारत में 108 राफेल लड़ाकू विमान बनेगा और इसका 70 फीसदी काम एचएएल (हिस्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड) को मिलेगा और बाकी काम डास्सो एविएशन करेगी. लेकिन प्रधानमंत्री के डील साइन करने से दो दिन पहले हिस्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड का नाम कट जाता है. यह खेल कैसे हुआ किसी को पता नहीं, इस सवाल का जवाब कोई दे नहीं रहा है। प्रशांत भूषण का कहना है कि जो कम्पनी 60 सालों से विमान बना रही है वो बाहर कर दी जाती है और एक ऐसी कंपनी आ जाती है जिसका कोई अनुभव नहीं है. जिसे भारतीय नौ सेना को खास तरह का जहाज़ बनाकर देना था मगर वो नहीं दे पा रही है. यह सब रिलायंस डिफेंस के बारे में कहा जा रहा है कि इस कंपनी पर 8000 करोड़ का कर्ज़ा भी है भारतीय बैंकों का. यशवंत सिन्हा प्रशांत भूषण और अरुण शौरी का खुला आरोप है कि इस मामले में बड़ा घपला हुआ है. सरकार सीक्रेसी यानी गोपनीयता के करार का बहाना बना रही है.

यह वह भाजपा है जिसने बोफ़ोर्स तोप घोटाले पर हाय-तौबा मचा डाली थी। इस घोटाले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर वोटों की खेती की थी, आज जब उस पर राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर चौतरफ़ा ऊँगली उठाई जा रही है तो वो संसद में या पब्लिक में सफ़ाई पेश करने की बजाय गोपनीयता का हवाला देकर गोलमोल बातें कर रही है।

बेशक रक्षा सौदों में गोपनीयता रखनी चाहिए इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए लेकिन घोटाले का आरोप लगाने वाले और पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास रखने वाले सिर्फ़ इतना जानना चाहते हैं कि आख़िर कितने में राफ़ेल विमान ख़रीदने का सौदा हुआ है और हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड को बाहर करके रिलायंस डिफ़ेंस को क्यों शामिल किया गया ? इतनी सी सफ़ाई देने में कौन सी गोपनीयता भंग हो रही है। सरकार को इतनी सी सफ़ाई देना ही चाहिए वरना विरोधी दल घोटाले का आरोप लगाते रहेंगे और पब्लिक के बीच मोदी सरकार की ईमानदारी संदिग्ध बनती जाएगी। अगर केंद्र सरकार राफ़ेल पर पारदर्शी जवाब पेश नहीं करती तो आमजन यही क़यास लगाएँगे कि दाल में कुछ काला ज़रूर है। कुछ तो परदेदारी है जो जानबूझकर छिपाई जा रही है। राफ़ेल सौदा जिसे अब बड़ा घपला क़रार दिया जाने लगा है, से पीएम मोदी की साख को बट्टा लगने लगा है।

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