आखिर क्या है सच सायनाइड का ……….

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दुनिया के सबसे खतरनाक जहर सायनाइड है सायनाइड के बारे में यह कहा जाता है कि इसे चखते ही इंसान की मौत हो जाती है और यह अब तक पता नहीं चल पाया है कि इसका स्वाद कैसा होता है। सायनाइड के बारे में फैले कुछ भ्रम और उसका सच ये है
सायनाइड उन रासायनिक पदार्थों का ग्रुप होता है जिनमें कार्बन और नाइट्रोजन का बॉन्ड पाया जाता है। सायनाइड का नाम उनमें पाए जाने वाले तत्व के मुताबिक होता है। जैसे अगर कार्बन और नाइट्रोजन के साथ हाइड्रोजन है तो हाइड्रोजन सायनाइड कहा जाता है। अगर पोटैशियम मिला है तो उसे पोटैशियम सायनाइड कहा जाता है।
सारे सायनाइड खतरनाक नहीं होते हैं। सोडियम सायनाइड , पोटैशियम सायनाइड हाइड्रोजन सायनाइड और सायनोजेन क्लोराइड कुछ ऐसे सायनाइड हैं जो घातक होते हैं। इसके अलावा बहुत से ऐसे नाइट्राइल्स कंपाउंड्स हैं जिनमें सायनाइड ग्रुप मौजूद होता है लेकिन वे जहरीले नहीं होते हैं बल्कि उनमें से कुछ का तो दवाओं में इस्तेमाल होता है।
सायनाइड की मात्रा, शरीर में प्रवेश का तरीका आदि इस बात को तय करता है कि जहर कितनी तेजी से असर करेगा। निगलने के मुकाबले सांस के जरिये शरीर में सायनाइड का पहुंचना ज्यादा खतरनाक होता है। अगर सायनाइड की कम मात्रा शरीर के अंदर गई हो तो उसका असर कुछ घंटे या कुछ दिनों बाद होगा। शरीर में इसकी ज्यादा मात्रा जाने पर ही तुरंत असर होता है। करीब 1 मिलिग्राम से कम सायनाइड ज्यादा खतरनाक नहीं होता है, वहीं 3 ग्राम से ज्यादा मात्रा होने पर तुरंत मौत हो सकती है।
वैसे ज्यादातर सायनाइड स्वाद में कड़वा होता है। हाइड्रोजन सायनाइड, सोडियम सायनाइड और पोटैशियम सायनाइड का स्वाद बादाम जैसा कड़वा होता है। सायनाइड ठोस, द्रव और गैस तीनों रूप में पाए जाते हैं। हाइड्रोजन सायनाइड कमरे के तापमान पर रंगहीन द्रव के रूप में होता है और ज्यादा तापमान पर रंगहीन गैस के रूप में। सोडियम सायनाइड और पोटैशियम सायनाइड पाउडर्स के रूप में पाए जाते हैं।
500 से ज्यादा पौधों में सायनाइड पाया जाता है। कसावा, आलू, लिमा बींस, बादाम, बांस, कॉर्न्स और कॉटन में भी सायनाइड पाया जाता है। इसके अलावा कुछ फल जैसे चेरी, नाशपाती, बेर आदि भी सायनाइड पैदा करते हैं। सेब की बीज और बादाम में भी सायनाइड पाया जाता है। इसके अलावा सिगरेट के धुएं, जलती प्लास्टिक, जलते कोयल आदि से भी सायनाइड पैदा होता है।
बड़ी मात्रा में सायनाइड शरीर में प्रवेश करने पर ऑक्सीजन और हमारी कोशिकाओं के बीच दीवार का काम करता है। जब कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिलता है तो कोशिकाएं मर जाती हैं। कोशिकाओं का मरना यानी इंसान का मरना। इस तरह से इंसान की मौत हो जाती है। सायनाइड से हृदय, शरीर की श्वसन प्रणाली और सेंट्रल नर्वस सिस्टम सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। शरीर में अगर सायनाइड की कम मात्रा जाती है तो हमारा शरीर खुद इसे हैंडल कर लेता है और सायनाइड को थायोसाइनेट में बदल देता है जो कम हानिकारक है और पेशाब के साथ शरीर के बाहर आ जाता है। इसके अलावा अन्य केमिकल के साथ मिलकर सायनाइड की थोड़ी मात्रा विटामिन बी12 बनाती है जो रेड ब्लड सेल्स और नर्व को स्वस्थ रखने में मदद करता है।