निदा खान का तीन तलाक अमान्‍य, शौहर के खिलाफ जारी रहेगा घरेलू हिंसा का केस

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बरेली =तीन तलाक और हलाला पीड़‍ित महिलाओं के लिए संघर्ष कर रही बरेली के प्रतिष्ठित आला हजरत खानदान की बहू निदा खान को बड़ी कामयाबी मिली है। जिले की एक अदालत ने मंगलवार को निदा खान को दिए गए तीन तलाक के आधार को अमान्‍य करार दे दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके शौहर शीरान रजा खां के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा जारी रहेगा।
इससे पहले सोमवार को बरेली के प्रतिष्ठित आला हजरत दरगाह ने एक फतवा जारी निदा खान को इस्‍लाम से बाहर करने का ऐलान किया था। निदा ने अपने शौहर शीरान के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस किया था। शीरान ने इस केस को खारिज करने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। शीरान कहा कि वह निदा को तलाक देकर उन्‍हें मेहर और इद्दत के दौरान उनके खर्च के लिए जरूरी रकम दे चुके हैं।
शीरान ने कहा कि अब उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला नहीं बनता है। एसीजेएम प्रथम की कोर्ट ने मंगलवार को शीरान की इस अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में निदा को दिए गए तीन तलाक के आधार को अमान्‍य करार दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर देते हुए कहा कि कानून में हिंदू महिला और मुस्लिम महिला के आधार के आधार पर फर्क नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा क‍ि शीरान खां के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला जारी रहेगा। उधर, निदा खान ने ऐलान किया है कि वह आला हजरत के फतवे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी। उन्‍होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है, इसलिए कानून का शासन चलेगा। इससे पहले बरेली की प्रतिष्ठित आला हजरत दरगाह ने निदा के खिलाफ फतवा जारी किया था।
बरेली की जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद खुर्शीद अलम रजवी के पूछे एक सवाल का जवाब देते हुए आला हजरत दरगाह से जुड़े मुफ्ती अफजाल रिजवी ने फतवे में लिखा है, ‘कुरान में हलाला का जिक्र है। अगर हिंदा (निदा) माफी नहीं मांगती हैं, तो उनका बॉयकॉट होना चाहिए। किसी को भी उनसे बातचीत या मुलाकात नहीं करनी चाहिए। साथ ही उनके साथ खाना भी बंद कर देना चाहिए। अगर वह बीमार होती हैं, तो कोई उनको देखने न जाए। यही नहीं अगर हिंदा की मौत हो जाती है तो न तो अंतिम प्रार्थना की जाए और न ही उन्हें कब्र में दफनाया जाए।’
निदा ने आरोप लगाया था कि 2015 में पति की पिटाई की वजह से उनका गर्भपात हो गया था। तभी से निदा ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला के खिलाफ मुहिम चला रही हैं। मुफ्ती मोहम्मद खुर्शीद अलम रजवी का कहना है, ‘निदा शरिया में बदलाव चाहती हैं, जबकि इस्लामिक कानून को अल्लाह ने बनाया है। चूंकि निदा कुरान और हदीस के खिलाफ बयान देती रही हैं, लिहाजा उन्हें इस्लाम से बेदखल किया जाता है। अगर वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगती हैं, तो वह फिर से हमारी बहन बन जाएंगी। अगर किसी महिला को तलाक या दूसरे मामलों में कोई शिकायत है, तो उसे दारुल-इफ्ता (मौलवियों की समिति या परिषद) के पास जाना चाहिए और इस्लामिक कानूनों का पालन करना चाहिए।’