प्रमोशन में आरक्षण. संवैधानिक पीठ करेगी सुनवाई

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नई दिल्ली =सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले में 2006 में दिए गए अपने फैसले के मामले में कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अब मामले को 7 जजों की संवैधानिक बेंच देखेगी। केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सात जजों की संवैधानिक बेंच मामले की जल्द सुनवाई करे। संवैधानिक पीठ देखेगी कि 2006 के सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच के फैसले पर दोबारा विचार की जरूरत है या नहीं।
2006 में नागराज से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने फैसला दिया था। 2006 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई की और कानून को सही ठहराते हुए शर्त लगाई थी कि आरक्षण से पहले यह देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और पिछड़ापन है या नहीं, और इसके लिए आंकड़े देने होंगे। नागराज के फैसले में कहा गया था कि क्रिमी लेयर का कान्सेप्ट यहां लागू नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल पेश हुए और कहा कि इस मामले को जल्दी सुना जाना चाहिए और सात जजों की बेंच जल्द सुनवाई करे क्योंकि रेलवे और अन्य सरकारी सेवाओं में लाखों लोग जो नौकरी में हैं वह प्रभावित हैं। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के कारण काफी कंफ्यूजन है। चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि इस मामले को संवैधानिक बेंच देखेगी। पिछले साल 15 नवंबर को कोर्ट ने कहा था कि संवैधानिक बेंच देखेगी कि 2006 के फैसले पर दोबारा विचार की जरूरत है या नहीं।