ख़तरनाक हैं ये चार शब्द…

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ज़हीर अंसारी
भाषा कोई भी हो चार शब्द बड़े ख़तरनाक हैं। ये चारों शब्द जीवन और सम्बंध बनाते नहीं बल्कि बर्बाद करते हैं। जिस मनुष्य ने इन चार शब्दों में से एक शब्द भी पकड़ लिए तो समझिए उसने अपनों के बीच बनी बनाई अपनी हैसियत पर प्रश्नचिन्ह लगा लिया। अलग-अलग भाषाओं में इन चार शब्दों को अलग-अलग बोला जाता है मगर अर्थसार एक ही होता है। ये चार शब्द हैं, ईर्ष्या, जलन, अहंकार और स्वार्थ। इन चारों शब्दों के अर्थभाव दुनिया की हर भाषा में समान हैं।

ईर्ष्या जिसे सामान्य रूप से पुरुषों के मामले में इस्तेमाल किया जाता है। जबकि महिलाओं के लिए जलन शब्द प्रयोग में लाया जाता है। मोटा-मोटी दोनों के मायने लगभग समान हैं। साधारण अर्थ में समझे तो जलने के बाद होने वाली चुनचुनाहट से समझा जा सकता है। चुनचुनाहट बड़ी बेचैनी पैदा करती है। न चैन से सोने देती है और न रहने देती है, पर जब तक ठीक न हो एहसास पूरे वक़्त कराती रहती है।

पुरुष वर्ग की चुनचुनाहट (ईर्ष्या) अपनों के साथ होती है जिन्हें वो जानते हैं। दोस्त-यार आगे क्यों बढ़ रहें हैं, तरक़्क़ी क्यों करते हैं, उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा क्यों है, उनकी पूछ-परख क्यों हैं, वो योग्य क्यों हैं, वग़ैरह-वैगरह। वो इसी में जले-भूने जाते हैं। जबकि महिलाओं में जलन नामक चुनचुनाहट होती है। महिलाओं की चुनचुनाहट सीमित होती है। उसने मुझे से अच्छे कपड़े-गहने पहने हैं, वो सुंदर ज़्यादा है या उसके पास भौतिक सुख-सुविधाएँ अधिक है। महिलाएँ इसी चुनचुनाहट में दुबला जाती हैं। परंतु महिलाओं की ख़ासियत है कि वह इन बातों को सिर्फ़ चर्चा तक सीमित रखती हैं, गंभीरता से नहीं स्थायी नहीं रखती।

इसके बाद शब्द आता है स्वार्थ यानी मतलब। कोई काम निकलवाना हो या फिर लाभ लेना हो या सहयोग लेना हो तो गधे को भी बाप बना लेने की प्रवृति को स्वार्थ कहा जा सकता है। लोग स्वार्थपूर्ति के लिए तलुए तक चाट लेते हैं। स्वार्थ पूरा होते ही स्वार्थपूर्ति करने वाला मूर्ख हो जाता है।

इसी तरह सर्वाधिक सुना और लिखा जाने वाला शब्द है अहंकार। जब आदमी मजबूरी से, मुफ़लिसी से, अशिक्षा से, सामाजिक उपेक्षा आदि से मुक्त हो जाता है तो उसके भीतर अहंकार का भाव आ जाता है, जो बार-बार छोटी-मोटी बातों पर भीतर ने निकलकर दहाड़ें मारने लगता है। जिस शरीर से ये दहाड़ें निकलती हैं वो अपने अतीत को जानबूझकर विस्मृत करने का दिखावा करता है। बात-बात पर स्वार्थी व्यक्ति स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने का प्रयास करता दिखता है।

ख़ैर, हिंदी शब्दकोष के शब्द ईर्ष्या, जलन, स्वार्थ और अहंकार आपसी रिश्तों के लिए अत्याधिक घातक हैं। जब चुभते हैं तो छाती चीर के पर हो जाते हैं। जितना संभव हो इन शब्दों के मायने से बचें वरना ये शब्द मधुर सम्बन्धों में मठा डालने के कारक बन सकते हैं।