प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों………….

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ज़हीर अंसारी

प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
जैसा कि आपको मालूम है इस वक़्त मोबाईल-इंटरनेट का नशा चढ़ कर बोल रहा है। देश की अधिकांश जनसंख्या इसके नशे में चूर है। दो-चार हज़ार रुपए से लेकर लाख-सवा लाख रुपए वाले मोबाईल का चलन है। आप लोग अपनी हैसियत का मोबाईल ख़रीदकर और डेटा पैक डलवा कर दिन-रात इसका इस्तेमाल करते हैं। बहुत अच्छी बात है, वक़्त के साथ चलना चाहिए, नहीं चले तो ‘हेय’ दृष्टि से देखे जाओगे। हो सकता है आप लोगों का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया जाए।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
बेशक आप मोबाईल-इंटरनेट का इस्तेमाल बेधड़क करते चलें। बाथरूम से लेकर दफ़्तर-दुकान तक, किचिन से लेकर बेडरूम तक, शादी के मंडप से लेकर मुक्तिधाम तक, जब जहाँ जैसा मौक़ा मिले वहाँ से चैट करें। फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर तफ़रीह करें। यू-ट्यूब और गूगल आदि पर सर्फ़ करें। वाट्सऐप और मैसेंजर पर उँगलियाँ दौड़ाएँ। घर-परिवार और अपनों का मोह त्यागकर नए-नए लोग-लुगाइयों से रिश्ते बनाएँ।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
मुझे पता है कि नौजवान लड़के-लड़कियों की तरह आप भी आमने-सामने बैठकर मोबाईल पर नए-नए रिश्ते-दोस्ती खोजते रहते हो। प्रोफ़ाइल चैक करते रहते हो, कोई नया साथी मिल जाए। कामधाम की चीज़ें तो कोई खोजता नहीं। वैसे भी भी मोबाईल-इंटरनेट की उपयोगिता आपको लोगों को सिर्फ़ इतनी समझ आती है, कुछ आया नहीं कि कापी-पेस्ट किया और फ़ॉर्वर्ड कर दिया। ठीक से पढ़ते भी नहीं, इसके परिणाम क्या होंगे, इसका मूल्याँकन भी नहीं करते। कोई नहीं यह आपका सिरदर्द है। आप चाहे तो एक बेड पर अलग-अलग चैट करो, ऑन-लाईन विचरण करो या फिर चोरी-छिपे इश्क़ लड़ाओ, मुझे क्या करना है।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
मैं तो सिर्फ़ इतना समझाने आया हूँ कि आप विवाहित लोग फ़ेक आईडी बनाकर किसी को फाँसने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर सायबर क्राइम तो बनता है, हो सकता है आप पति-पत्नी फ़ेक नामों से आभाषी दुनिया के ज़रिए एक दूसरे के साथ फिर से प्रेम के मोहफाँस में फँस जाएँ। हालाँकि आपके गृहस्थ जीवन में प्रेम और जुड़ाव का रिश्ता औपचारिक रह जाता है।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
मैं आपको यह इसलिए बता रहा हूँ कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के नौगावाँ सादात थाना क्षेत्र में अजीबोग़रीब घटना घटित हुई। पति-पत्नी दोनों ने फ़ेक आईडी बनाई और खोजने लगे नया मुर्ग़ा-मुर्ग़ी। इत्तेफ़ाक से पति-पत्नी फ़ेक आईडी के ज़रिए नए आशिक़ और माशूक़ बन गए। फिर क्या था दोनों के बीच मोहब्बतों का सिलसिला चल पड़ा। मैसेंजर और चैट के ज़रिए दोनों के जज़्बात गले मिलने लगे।जब मोहब्बत उफान पर पहुँचीं तो एक रेस्टारेंट में मुलाक़ात का दिन मुक़र्रर हुआ। मुक़र्रर दिन और जगह पर जब दोनों पहुँचे तो ‘रियल’ के पति-पत्नी एक-दूसरे को देखकर फ़नफ़ना उठे। हाय ये क्या…इसके बाद क्या हुआ होगा आप लोग बेहतर समझ सकते हैं।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
इसलिए मैं आपको समझाईश देता हूँ कि आप लोग फ़ेक आईडी बनाकर न इश्क़ लड़ाएँ और न ही अवांछित सामग्रियों का आदान-प्रदान करें। दोनों ही स्थितियों में डंका बजना तय है।
प्यारे पतियों और उनकी पत्नियों,
मैं यह क़तई नहीं कहता कि आप एक दूसरे के मोबाईल में तांकझाँक करें। अगर ऐसा करेंगे तो आप दोनों की स्वतंत्रता का हनन होगा। हो सकता है कि आप दोनों के दरम्यान असहिष्णुता फैल जाए। लिहाजा चतुराई से नए दोस्त-दोस्तन बनाएँ। प्रत्यक्ष भेंट के पूर्व खोजबीन ज़रूर कर लें, जिससे मिलना है वह अपना या अपनी तो नहीं है।