मध्यप्रदेश के मैदान में बसपा-सपा अलग अलग

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राकेश दुबे

मध्यप्रदेश में चुनावी रंग दिखने लगा है | राहुल गाँधी, अमित शाह और बदले कायर्क्रम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश के दौरे कर रहे हैं तो अब समाजवादी पार्टी ने भी इस चुनाव में उतरने का मन बना लिया है | इसी उद्देश्य को लेकर अखिलेश यादव १९ एवं २० जुलाई को मध्यप्रदेश में रहेंगे | सवाल यह है की समाजवादी दल यहाँ किसके साथ होगा ? उसकी थोड़ी बहुत ताकत जिन सीटों पर दिखती है वहां बसपा से उसका मुकाबला होगा, दोनों का मतदाता समूह समान है | समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन की संभावनाओं के बीच अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी अलग योजना बनाई है। लखनऊ में आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में अखिलेश यादव ने ऐलान किया कि मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशी खड़े करेगी।
आने वाले अगले कुछ दिनों में समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत कर चुनाव में हिस्सा लेगी। इसके लिए समय-समय पर बूथ स्तर और विधानसभा स्तर पर सुनियोजित ढंग से कार्यकर्ताओं को तैयार किया जाएगा। अखिलेश यादव ने कहा कि आने वाली 19 और 20 जुलाई को वो मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वो भोपाल में कार्यकर्ताओं की बैठक को भी संबोधित करेंगे।
अखिलेश यादव का मानना है कि मध्य प्रदेश में लोग भाजपा से नाराज हैं लेकिन वो कांग्रेस से भी खुश नहीं हैं। समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश में एक मजबूत विकल्प के तौर पर उन्हें दिखती है । अखिलेश ने कहा कि यूपी के विकास की सूचना मध्य प्रदेश के गरीबों को है। वे समाजवादी सरकार की योजनाओं से प्रभावित हैं। मध्यप्रदेश में किसानों को भुगतान एक-एक साल तक नहीं होता है। उनका शोषण होता है। अखिलेश ने कहा कि मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी बड़ी भूमिका में होगी।
अखिलेश यादव का मानना है कि भाजपा की सरकारें नकारात्मक प्रशासनिक व्यवस्थाएं चला रही है। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने राज्य को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। किसानों को कर्जमाफी के नाम पर धोखा मिला है। उनके आंदोलन पर दमनचक्र चला है। अखिलेश से इतर मुलायम सिंह सोचते है | उन्होंने दिल्ली में कहा है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में न उलझ कर समाजवादी पार्टी को २०१९ के चुनाव को मद्देनजर रखते हुए बसपा और समाजवादी गठ्बन्धन को उत्तरप्रदेश में ही मजबूत करना चाहिए |भाजपा इस समाजवादी घोषणा को अपनी रणनीति की सफलता मान रही है | उसका मानना है कि समाजवादी और बसपा मिलकर कांग्रेस के मतदाता समूह को ही अपनी और आकर्षित करेंगे | भाजपा को यह खुशफहमी है की उसका वोट बैंक २०१३ की भांति सुरक्षित है