राहुल के मुकाबले शाह-मोदी की जोड़ी प्रदेश में

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राकेश दुबे

किसान आन्दोलन के पहले चरण का आज अंतिम दिन है | १० दिन के इस आन्दोलन ने जनता को कोई कष्ट नहीं पहुँचाया, लेकिन नीचे से उपर तक नेताओं को जमीन दिखा दी | मध्यप्रदेश के सन्दर्भ विशेष को लें कांग्रेस जहाँ इस अवसर को भुनाने मंब सफल रही है तो भाजपा सख्ती बरतने के बाद अपनी रणनीति बदलने को तैयार हुई है | अब प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी किसानों से सीधे संवाद के लिए मैदान में उतर रही है | १२ जून को अमित शाह और २३ जून को नरेंद्र मोदी प्रदेश में आ रहे हैं | अपने किसान पुत्र कहने वाले, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो जन आशीर्वाद यात्रा के बहाने किसानों से सीधी बात करने जा रहे हैं |

किसान देश भर में कहीं न कहीं आंदोलन कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी भी अन्नदाताओं के गुस्से को भुनाने में जुटी है। मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी के छह जून को थी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता और चुनौतियां बढ़ा दी हैं। चिंता इस बात की किसानों की हित के लिए काम किए जाने के बाद भी क्यों सरकार के प्रति किसानों का मोहभंग हो रहा है वहीं चुनौती यह है कि किसानों के दर्द को कैसे कम किया जाए? अगर कांग्रेस इसी तरह से किसानों को लुभाती रही तो वह भाजपा के लिए पहले मध्यप्रदेश में फिर देश में बड़ा खतरा बन सकती है।

बात साफ है कि अभी खेमों बंटी हुई कांग्रेस जब मंदसौर में इतने किसानों को एकत्रित कर सकती है तो आने वाले समय में वह किसानों को सरकार के खिलाफ भी कर सकती है। मंदसौर में जिस तरह से राहुल गांधी ने किसानों को गले लगाया है और लोन माफ किए जाने की बात की है उनकी इन बातों ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की पेशानी पर चिंता की लकीरें ला दी है। राहुल गांधी को जवाब देने और किसानों को मनाने के लिए मोदी शाह की जोड़ी एक भार फिर मध्यप्रदेश के दौरे पर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी २३ जून को राजगढ़ के मोहनपुरा में बांध सहित दो सिंचाई परियोजना भी शुरू करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि यहां वह जब आम सभा को संबोधित करेंगे। लेकिन राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि राहुल गाँधी से मिली कड़ी चुनौती पिछले १५ सालों से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार के लिए खतरा भी बन सकती है।राहुल ने जिस तरह से पिछले दिनों मंदसौर में भाजपा सरकार को घेरा है और सवाल खड़े किए हैं उसका जवाब देने के लिए 12 जून को अमित शाह जबलपुर और २३ को नरेंद्र मोदी प्रदेश में आ रहे हैं |
यह बात साफ है कि केंद्र सरकार किसानों की नाराजगी को बहुत अच्छे से समझ भी रही है, यही वजह है कि मोदी कैबिनेट ने गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भारी-भरकम पैकेज मंजूर किया है। लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि किसानों की समस्याओं को दूर कैसे किया जाए। बता दें कि इसी साल के अंत तक मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और यह भाजपा के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है।