बिहार में सीट को लेकर नीतीश ने पेंच फंसाया

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नई दिल्ली =2019 के चुनावों का बिगुल एक तरह से बज ही गया है। देश के अलग-अलग राज्यों में जहां बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने की तैयारियां चल रहीं हैं, वहीं बीजेपी के अपने गठबंधन यानी एनडीए की तस्वीरें भी अभी साफ होनी बाकी हैं। एनडीए के लिहाज से दो राज्यो में मामला फंसा नजर आ रहा है। एक महाराष्ट्र जहां एनडीए की घटक शिवसेना ने विद्रोही रुख अख्तियार कर लिया है, दूसरा बिहार जहां नीतीश, रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्म्युला तय नहीं हो पाया है। जेडीयू ने साफ कर दिया है कि बिहार में एनडीए के नेता नीतीश होंगे और पहले से पार्टी 25 सीटों पर लड़ती रही है। उधर, सुशील मोदी ने कहा है कि हम मोदी के नाम पर और नीतीश के काम पर वोट मांगेंगे, कौन कितने पर लड़ेगा, यह बैठकर तय करेंगे।

देशभर में 4 लोकसभा सीटों और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आने के बाद से बिहार की सियासत का पारा भी चढ़ गया है। उपचुनावों में बीजेपी को लगे झटके के बाद बिहार में भी एनडीए के सहयोगी दलों ने एक तरह से दबाव की सियासत शुरू कर दी है। इसकी पहल नीतीश कुमार पहले ही कर चुके थे जब पिछले दिनों उन्होंने एक बार फिर नोटबंदी और विशेष राज्य का मुद्दा उठा दिया। इसी बीच रविवार को जेडीयू की अहम बैठक हुई है जिसमें फैसला लिया गया है कि सीएम नीतीश कुमार बिहार में एनडीए का चेहरा होंगे।
अब मामला सीट शेयरिंग का है। इस मामले को हवा भी जेडीयू ने ही दी है। बैठक के बाद जेडीयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने साफ कहा कि उनकी पार्टी 25 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है और बीजेपी 15 पर। अजय आलोक के मुताबिक उनकी पार्टी में भ्रम की स्थिति नहीं है लेकिन अब कई अन्य पार्टियां भी हमारे साथ हैं तो सभी बड़े नेता मिलकर सीटों के बंटवारे पर फैसला करेंगे। उन्होंने भी कहा कि एनडीए गठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार होंगे।

रविवार को जैसे ही जेडीयू ने बैठक के बाद कहा कि नीतीश एनडीए का चेहरा होंगे, तेजस्वी को तंज कसने का मौका मिल गया। तेजस्वी ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया कि क्या सुशील मोदी मानते हैं कि बिहार में नीतीश पीएम से बड़े और ज्यादा प्रभावशाली नेता हैं? सुशील मोदी ने सोमवार को एक तरह से इसका जवाब दे दिया। बिहार के डेप्युटी सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने कहा है कि हमारे बीच में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा, ‘जब दिल मिल गए तो सीट कौन सी बड़ी चीज है। हर चुनाव के अंदर कौन कितना लड़ेगा, नहीं लड़ेगा, ये सारा जिस दिन बैठेंगे, सारी चीजों का ऐलान हो जाएगा।’

सुशील मोदी ने आगे कहा कि ‘देश के पीएम नरेंद्र मोदी हैं, लेकिन बिहार के नेता नीतीश कुमार हैं। इसलिए बिहार में जो वोट मिलेगा वह नरेंद्र मोदी के नाम पर और नीतीश कुमार के काम पर मिलेगा। इसमें विरोधाभास कहां है।’ हालांकि सुशील मोदी ऐसा दावा कर तो रहे हैं लेकिन जेडीयू का सुर अलग है। जेडीयू नेता पवन वर्मा ने कहा कि सीटों को लेकर बातचीत होगी। उन्होंने कहा कि बिहार में संदर्भ में देखें तो हमारे मुताबिक जेडीयू हमेशा से सीनियर पार्टनर रही है। उन्होंने कहा कि एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है तो ऐसे में हमें उम्मीद है कि वह अपने सहयोगियों से पारस्परिक सम्मान और आपसी समझ के हिसाब से बर्ताव करेगी।

बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2014 में नीतीश कुमार एनडीए के साथ नहीं बल्कि अकेले लड़े थे। एनडीए में बीजेपी, एलजेपी, आरएलएसपी और उस समय ‘हम’ शामिल थीं। बीजेपी को 29 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें से 22 पर जीत मिली, एलजेपी 7 पर लड़ी और 6 पर जीती, आरएलएसपी 4 पर लड़ी और 3 पर जीती। इस हिसाब से 2014 में एनडीए के खाते में 32 सीटें आईं थी। जेडीयू ने अकेले चुनाव लड़ा और 40 में से 2 पर जीत मिली।

2009 में ऐसी स्थिति नहीं थी। तब नीतीश कुमार और बीजेपी के गठबंधन ने एक साथ चुनाव लड़ा था। नीतीश की पार्टी 25 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें 20 पर जीत मिली थी और बीजेपी 15 पर लड़कर 12 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। 2004 में नीतीश और बीजेपी के बीच सीट शेयरिंग का यह रेशो 26-14 सीटों का था। अब आपको स्पष्ट रूप से समझ में आ गया होगा कि जेडीयू के प्रवक्ता अजय आलोक 25 सीटों वाले आंकड़े पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं।

2019 में अगर पासवान, उपेंद्र कुशवाहा संग नीतीश एनडीए के साथ रहे तो सीट शेयरिंग का फॉर्म्युला काफी जटिल होने जा रहा है। सुशील मोदी के बयानों पर गौर करें तो एक तरह से यह इस बात का संकेत है कि बीजेपी भी बिहार में नीतीश के चेहरे को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन मामला सीट शेयरिंग पर कैसे साफ होगा, इसपर कोई भी नेता अभी स्पष्ट टिप्पणी नहीं कर पा रहा है।