सुकमा में जानवरो की तरह रहते है जवान

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बलिया =छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के हमले में शहीद बलिया के सीआरपीएफ जवान मनोज सिंह की शहादत की सूचना जैसे ही उनके घर पहुंची तो परिवार में हाहाकार मच गया। पिता की आखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिता का कहना है कि उनको अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। वहीं सरकार से नाराज शहीद मनोज की पत्नी ने कहा कि सरकार सुकमा में जवानों को कोई सुविधा नहीं देती है।
पति की मौत की खबर के बाद से सुमन का रो-रो कर बुरा हाल है। वह रोते हुए बताती हैं कि मनोज का सपना बच्चों को हॉस्टल में भेजकर अच्छी शिक्षा देने का था। वहीं मनोज की पत्नी का ये भी कहना है कि सरकार न तो वहां कोई सुविधा दी है, न ही वहां बात करने के लिए नेटवर्क काम करता है। वह कहती हैं, ‘वहां इंसानों को जानवर की तरह रहना पड़ता है। सरकार को इससे क्या फायदा मिलता है? सरकार को इन हमलों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए।’
शहीद मनोज अभी पिछले शानिवार को ही घर से गए थे और मई में दोबारा आने को फिर गए थे। मनोज के पिता को अपने बेटे की शहादत पर गर्व तो है मगर वो बोलते-बोलते रुक जाते है और उनके आंखों से आंसू बह निकलते हैं।
छत्तीसगढ़ के सुकमा में मंगलवार दोपहर को सर्च ऑपरेशन में जुटे सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर किए गए माओवादियों के हमले में 9 जवान शहीद हो गए। नक्सल प्रभावित सुकमा के किस्तराम इलाके में दोपहर साढ़े 12 बजे सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन पर यह हमला हुआ।