ओके बाबू…..टाटा…बाय-बाय……

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ज़हीर अंसारी
क्या सोचकर शामिल हुए थे ? कि सरकार खुश होगी, तुम्हारे राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देगी ? तुम तो सरकार बनने से पहले गठबंधन में शामिल हुए थे, फिर यह मांग क्यों ? क्या तुम अपने राज्य में अपने बूते कुछ नहीं कर पाए ? अपने राज्य की जनता से वायदा तो तुमने किया था, अब अपने बूते पूरा करो। क्या मेरे सहारे जनता को दिव्य स्वप्न दिखाए थे ? क्या तुमने भी जुमलेबाजी का सहारा लिया था ? अगर हां … तो उनके सामने सफाई पेश करो, यहां दबाव की सियायत क्यों कर रहे हो ?

सरदार आपने ही कहा था कि मैं समझूंगा, खजाना खोल दूंगा, विकास का दरिया बहा दूंगा। याद करिये सरदार क्या-क्या लच्छेदार बातें की थीं।

तो क्या … हर वायदा पूरा करना संभव है। कितने राज्य हैं तुम्हें पता है ? मुझे तो सबके लिये सोचना पड़ता है। मेरा कमिट्मेंट भी ’सबका साथ सबका विकास’ का है।

पर सरदार …. राज्य की हालत पंचर है। मैं कुछ ज्यादा कर नहीं पाया। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया है। आप के खजांची थोड़ी-थोड़ी रकम ट्रांसफर कर रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी के कारण राज्य की हालत पतली हो गई है। जीएसटी का शेयर भी वक्त पर नहीं आ रहा है। ऐसे में विशेष राज्य का दर्जा तो देना ही चाहिए। वैसे भी इस माँग पर मेरी इज़्ज़त दाँव पर लगी है।

असंभव ….. तुम अकेले होनहार नहीं हो। तुम ठहरे बाहरी, हम अपने लोगों को वित्तीय मदद नहीं कर पा रहे हैं तो तुम्हारे कैसे करेंगे। भयवश हमारे अपने मुँह में ताला लगाए बैठे हैं और तुम और तुम्हारे लोग खुलेआम ग़दर कर रहे हैं।

सरदार …. अब तो सोचना ही पडेगा आपको। वरना राज्य की जनता मेरी बखिया उधेड देगी। जनता को बहलाने-फुसलाने का बहुत प्रयास कर लिया। अब वक्त बहुत कम है मेरे पास, मुझे कुछ करके दिखाना है। ’विकास’ की चमचमाहट नहीं दिखाई तो जनता मुझे तलाक दे देगी। सरदार …. देखिए न हमारे साथ घोर अन्याय हुआ है। हमारा सबसे खूबसूरत शहर और बड़ी आमदनी का जरिये आप सब ने मिलकर छुटकू से सूबे को दे दिया।

गलत बात …. मैंने कोई बटवांरा-वटवांरा नहीं किया। यह पहले वाले सरदार ने किया था। उस सरदार की पार्टी ने होशियारी दिखाई थी। उस पार्टी ने यह चतुराई न की होती तो राजसिंहासन तुम्हें न मिल पाता। जाओ, इस सवाल का जवाब उन्हीं से मांगों।

पर सरदार …. हमारा चलेगा कैसे? अब तो जनता के सामने जाने पर लज्जा आने लगी है। फायनली कहे देता हूं कि यदि मेरे राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया गया तो आपकी सेना में शामिल हमारे जवान हथियार डाल देंगे।

अच्छा …. अरे ओ खजांची, जरा बताना तो इसके कितने सैनिक शामिल हैं हमारी सेना में।

सरदार …. कुछ सोलह हैं। दो हथियारधारक और बाकी पैदल में शामिल हैं।

हम्म…. कितना रुपया लगेगा अगर इसे विशेष राज्य का दर्जा देते हैं तो ?

सरदार…. पचासों हजार करोड रुपये देना पड जाएगा। अपना खजाना वैसे भी खाली है। कर्ज और खर्च पूरा करते-करते मेरी आंखें और कमर टूटी जा रही है। सरदार… अगर आप कहेंगे तो थोडी-मोडी रकम साईड से दे सकते हैं।

अरे भाई खजांची…. सोचो इनके बारे में अपना पुराना साथी है।

सरदार…. इनको दिया तो अपने दूसरे साथी जो ’लार’ टपकाए बैठे हैं हम पर फौरन चढ़ बैठेंगे। यही नहीं अपने भी तो बहुतेरे बच्चे हैं वो सबरे मुंह फुला लेंगे। उन्हीं की दम पर तो अपन यहां तक पहुंचे हैं। अपने खफा हुए तो समझो लफड़ा ही लफड़ा। आपसे मुंह लगने की तो किसी की हिम्मत नहीं होती सब आकर मेरे बाल चीथेंगे। वैसे भी गिनती के बाल बचे हैं। और वो महाराष्ट्र वाला साथी हर बात पर बाहें सिकोडता रहता है, किस-किस को पटाऊंगा।

हम्म्म …. जरा फिर से बताना कि इसके कितने सैनिक हैं।

जी सरदार ….. यही कोई सोलह। ये चले भी गए तो कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा सरदार, काफी नए सैनिक भर्ती हो गए हैं, जरुरत पड़ेगी तो कहीं से भी बटोर लाएंगे।

ओके ….. सुन बाबू, तेरी मांग बड़ी कठिन है। खजाने की स्थिति तुने समझ ही ली है। जितने तेरे सैनिक हैं उससे कहीं ज्यादा मेरे सेनापति हैं जो अलग-अलग राज्यों में मोर्चा संभाले हैं। कम से कम उन्हें तो मैं नाराज नहीं कर सकता। तुझे दिया तो उन्हें भी देना पडेगा। इसलिये मेरी तरफ से तो ’न’

सोच लो सरदार… मेरे जवान हथियार डाल देंगे, फिर मत कहना। वैसे आजकल आपको दक्षिण से ज्यादा उत्तर और उत्तर-पूर्व की फिक्र हो रही है। बताए देता हूँ आड़े वक़्त दक्षिण वाले ही काम आएँगे।

ठीक है भाई… तुझे जो समझना है, समझ ले पर तेरी बात समझने के लिए मैं खजाना नहीं लूटा सकता। खजाना भरने के लिये कितनी जद्दोजहद करना पड़ रही है, यह तरकीबें तेरे पल्ले नहीं पडेगा। और सुनो भाई तुम लोग कब तक अपना-अपना राग अलापोगे, कभी देश और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के बारे में भी सोच लिया करो।

फिर ठीक है सरदार …. ये रहे आपके हथियार, संभालो इन्हें, मैं चला वापस।

जाते-जाते यह तो बता जा, तेरे ये सैनिक अब करेंगे क्या ?

कुछ नहीं सरदार…. आपकी अंतिम पंक्ति में खडे होकर आपकी जय-जयकार करेंगे और क्या।

तो फिर ठीक बाबू…. टाटा, बाय-बाय।