जनता का सामना करने से क्यों डरते है नेता

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जबलपुर। क्या नेता और राजनैतिक पार्टियां सिर्फ जनता को वोट बैंक की तरह उपयोग कर रहीं हैं, आज यह सवाल अहम होता जा रहा है। दरअसल इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि संवेदनशील मसलों पर इनकी चुप्पी तथा पूरा भार प्रशासनिक अमले पर डाल देना होता है। जबकि यह चाहें तो उस मसले को वहीं के वहीं निपटा सकते हैं। खासतौर पर चुने हुये जनप्रतिनिधी फिर वह सांसद, विधायक या पार्षद ही क्यों न हो।
उल्लेखनीय है कि बीते कई वर्षों से शहर में एक परिपाटी चल रही है, संवेदनशील मुद्दों पर चुने हुये जनप्रतिनिधियों की चुप्पी। इसके चलते शहर के अनेक ऐंसे क्षेत्र हैं जो अतिसंवेदनशील हो गये हैं। जिसमें सांसद और विधायक तो ऐंसे मसलों में बोलने से भी बचते दिखाई देते हैं। जबकि ये उनका नैतिक दायित्व होता है कि उनके क्षेत्र में कहीं भी कोई सम्प्रदायिक सौहाद्र बिगाड़ने की बात हो या फिर प्रशासनिक अमले की चूक हो उस पर उनका रहना निहायत ही जरूरी होकर उच्च अधिकारियों से विचार विमर्श कर शहर की फिंजा को शांत रखना है।
संभाल सकते हैं महौल
जानकारों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र का पार्षद या विधायक उस क्षेत्र की जनता द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि होता है, ऐंसे में अगर कहीं कोई घटनाक्रम हो रहा है, तो उसकों रोकने का दायित्व भी उसी का होता, क्योंकि वहां की जनता जो बात अपने जनप्रतिनिधि की मानेगी वह किसी प्रशासनिक अफसर की नहीं मानेगी। लेकिन लगता है शहर में इस प्रकार के जनप्रतिनिधि बचे ही नहीं हैं।
पनागर विधायक ने निपटाये मामले
हालांकि ऐंसे मामलों में पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदु अपना विशेष योगदान देने से नहीं चूकते। वह जहां भी कोई घटना घटती है उस घटना में तत्काल पहुंच जाते हैं। और घटना का तत्काल निराकरण करवाने में प्रशासन के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाते हैं। फिर चाहे मामला तालाब में से निकली शव यात्रा का हो, बरेला में ट्रक दुर्घटना या फिर पनागर में पुलिस की मारपीट में आॅटो चालक की मौत का मामला। इन तीनों ही मामलों में विधायक ने अपनी बुद्धि का उपयोग कर तत्काल ही जहां के तहां निपटा दिया।
आम जनता को होता है नुकसान
कहा जाता है कि कहीं भी कोई घटनाक्रम होता है, उससे उस क्षेत्र के नागरिकों में एक भय व्याप्त हो जाता है, साथ ही आम-जनता के साथ व्यापार में भी व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कभी-कभार उन्हें इतनी भारी पड़ती है, क्षेत्र मे कर्प्यू जैंसे हालात पैदा हो जाते हैं। आखिर इन सबका जिम्मेदार अकेला प्रशासन तो नहीं हो सकता।
विपक्ष को मिलता है राजनीति का मौका
देखने में आया कि जब भी इस प्रकार की वारदातें कहीं होती है, तो वहां पर विपक्ष की भूमिका निभाने वालों को राजनीति करने का मौका मिल जाता है। उन्हें इस बात की कहीं कोई चिंता नहीं रहती की पीड़ित परिवार या क्षेत्र वासियों को इस राजनीति से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ इस बात की चिंता होती है कि उनको राजनीति करने का मौका मिल रहा है। जिसके चलते वह क्षेत्र में अपनी पहुंच बरकरार रख सकें। जबकि इस प्रकार के संवेदनशील मसलों पर राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं को एकजुट होना चाहिये। और अगर कोई दोषी है तो उसे तत्काल सजा भी मिले ऐंसा प्रयास होना चाहिये।
फोटो प्रतीकात्मक है