ज्योतिष में छिपा है मृत्यु का समय

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क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में भी असमय मृत्यु को लेकर कई शोध हुए हैं, जिन्हें आधार बनाकर कई रहस्यों के बारे में विस्तार से बताया गया है। क्या हैं वह लक्षण चलिए जानते हैं…
दरअसल अगर कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए तो हम स्वयं भी अपनी मृत्यु के समय और स्थिति के बारे में जान सकते हैं। जैसे शास्त्र अनुसार जन्म कुंडली का आठवां घर मृत्यु के संबंध में जानकारी देता है। वैसे तो तीसरा और दसवां घर भी आपकी मृत्यु के संकेत बताता है। इसके साथ ही कुंडली में इन घरों में जो ग्रह होते हैं या इन घरों के स्वामी जहां होते हैं, उसके मुताबिक भी मृत्यु की संभावना जताई जा सकती है।
शास्त्रों में शन‌ि ग्रह को आयु के मामले में हमेशा से ही बहुत खास माना जाता रहा है। दरअसल शन‌ि यदि आपकी कुंडली में शुभ ग्रह के साथ मजबूत स्‍थ‌ित‌ि में होता है तो इससे भी आपकी लंबी उम्र का पता चलता है। इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात है कि म‌ित्र ग्रह के साथ शन‌ि होने पर मध्यम आयु और शत्रु ग्रह से पीड़‌ित शन‌ि होने पर व्यक्त‌ि की अल्पायु हो सकती है। वहीं कुंडली में आठवें घर में इसका होना लंबी बीमारी, हड्ड‌ियों में तकलीफ, वात, घाव और व‌िषैले बुखार से मृत्यु प्राप्त करने के संकेत देता है।
कुंडली के आठवें घर में सूर्य होता है उनकी मृत्यु अग्न‌ि, बुखार, मूत्र संबंधी परेशानी से होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे तो इंसान को कभी नहीं पता चलता कि उसका अंत कितना नजदीक है, लेकिन पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं कुछ ऐसे लक्षण बताएं हैं जो मृत्यु के नजदीक होने की ओर इशारा करते हैं।
आमतौर पर हमें तेल या पानी में झांकते हुए अपनी परछाई उसमें नजर आती है, लेकिन जिस व्यक्ति की मौत नजदीक है उसे अपना अक्स नजर नहीं आता। इसके साथ जिनकी कुंडली में चंद्रमा आठवें घर में होता है तो ये इस बात का संकेत है क‌ि उस जातक की जल में डूबने, फेफड़ों में तकलीफ आदि से मृत्यु हो सकती है। वहीं क्षय रोग के कारण भी जीवन पर संकट आ सकता है।
खास बात है कि ज्योतिष शास्त्र में मंगल दुर्घटना का कारक ग्रह माना जाता है। इसके आठवें घर में होने पर व्यक्त‌ि की मृत्यु आग, दुर्घटना, घाव, शल्य-च‌िक‌ित्सा, त्वचा रोग, वाहन दुर्घटना, जादू-टोना, ऊंचाई से ग‌िरने आदि से होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे माना जाता है कि जब किसी व्यक्ति को हर जगह आग का भ्रम होने लगता है तो भी इसका अर्थ है कि उसकी मौत निकट है।
इसके अलावा बुध के आठवें घर में होने पर नसों में कमजोरी, अंडकोश संबंध‌ित रोग, वात, लकवा, अपच से मृत्यु का अंदेशा रहता है। वहीं गुरु के आठवें घर में रहने से व्यक्त‌ि की आकस्म‌िक हृदय रोग से मृत्यु हो सकती है। साथ ही दुर्बलता, क‌िडनी और यकृत संबंधी परेशानी से भी मृत्यु की आशंका बनती है। ध्यान दें कि आठवें घर में शुक्र का होना उदर रोग, यौन रोग, मूत्र संबंधी रोग से मृत्यु का कारक बनता है।