गुप्त पूँछधारी तो मूतेंगे…गंदगी करेंगे….

0
47

ज़हीर अंसारी
प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री या फिर नगर निगम प्रशासन लाख कहें कि स्वच्छ भारत बनाना है, साफ़-सफ़ाई रखना, घर, मोहल्ला और शहर को साफ़-सुथरा रखना हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं कि समझते ही नहीं। कभी-कभी लगता है ऐसे लोगों के दिमाग़ में गुप्त पूँछ लगी हुई है। जो सीधे होने का नाम ही नहीं लेती। तिरछी पूँछ वाला जानवर भी पढ़ाए-समझाए सीख जाता है परंतु गुप्त पूँछ वाला समझने तैयार नहीं। इनकी पूँछ का कोई छोर पकड़ नहीं रहा कि किनारा पकड़ कर सीधा किया जा सके। यही सब सोच-सोच कर भेजे का दही बना जा रहा। इसी चक्कर में नए साल का पहला हफ़्ता बर्बाद चला गया।

सुबह से शाम तक गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले गीत सुनाया जा रहा है। कचरे वाली गाड़ी में कचरा डालो जी। शहर की मुख्य सड़कों और स्थानों पर वॉल पेटिंग के ज़रिए संदेश दिया जा रहा कि ‘मेरा शहर मेरी ज़िम्मेदारी।’ मीडिया के अलावा तरह-तरह के प्रचार माध्यमों से बताया जा रहा कि शहर को स्वच्छ रखना हैं। इस सबके बावजूद गुप्त पूँछ वाले सुधरने और मानने तैयार नहीं हो रहे हैं। जहाँ मर्ज़ी वहीं खोल कर खड़े हो गए। कहीं भी गंदगी कर दी, कहीं भी कूडा-करकट फेंक दिया।

मिस्टर एक्स को देखिए। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है कि मेरा शहर मेरी ज़िम्मेदारी, फिर भी दादा नीचे मुंडी किए अपनी ज़िम्मेदारी पेशाब में बहा रहे हैं। मिस्टर वाई और ज़ेड

है। ये दोनों जहाँ खड़े धार मार हैं, वहीं बाउंड्री के उस तरफ़ नगर निगम द्वारा बनाया मूत्रालय है। आँखों और विवेक के इन अंधों का क्या किया जाए ? इन जैसे लोगों के रहते अपना शहर कभी भी स्वच्छता सर्वेक्षण में नम्बर वन नहीं आ सकता।

जनता की गाढ़ी कमाई से शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाए जाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। नगर निगम की टीम, एनजीओ, सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संस्थाओं के साथ-साथ स्कूल-कालेज़ के बच्चे अपनी सहभागिता निभा रहे हैं परंतु चंद गुप्त पूँछधारी मानव सफ़ाई अभियान में पलीता लगा रहे हैं।

स्वच्छता के लिए संपत्तिधारकों की जेबें ख़ाली हो रही है। श्रम सब कर रहे हैं। जनचेतना जाग रही है। आमजन अपनी प्रवृति में सुधार ला रहा है। कल से आज बेहतर सफ़ाई व्यवस्था है। इसको और अच्छा करने है तो कड़े क़ायदे-क़ानून लाने ही पड़ेंगे। अराजक तरीक़े से गंदगी फैलाने वालों को कोड़े तो मारे नहीं जा सकते अलबत्ता भारी जुर्माना ज़रूर लगाया जा सकता है। कहीं पर गंदगी करने वालों की फ़ोटो क्लिक करने वालों को ईनाम दिया जाना चाहिए। मसलन अगर कोई अराजक ढंग से गंदगी या कूडा-करकट फेंकता है तो उसकी फ़ोटो उतारकर भेजने वाले को एक हज़ार रुपए का नक़द इनाम दिया जाना चाहिए, बदले में गंदगी करने वाले पर डबल जुर्माना लगना चाहिए। इसके दो फ़ायदे होंगे एक तो बेरोज़गारों को रोज़गार मिल जाएगा, दिन भर घूम-घूम कर फ़ोटो उतारेंगे दूसरे निगम ख़ज़ाने की आमदनी बढ़ेगी।