ट्रिपल तलाक़ -विवाह के मामले फौजदारी नहीं हो सकते = विवेक तन्खा

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नई दिल्ली = लोकसभा में तीन तलाक विरोधी बिल अपने बहुमत के दम पर पारित करने वाली बीजेपी को राजयसभा में तगड़ा झटका लगा है । राज्यसभा में बिल लंबित रहने के कारण अब सरकार के पास इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए बहुत सीमित विकल्प रह गए हैं। इस मसले पर राज्यसभा के पूर्व महासचिव वी. के. अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार के पास एक विकल्प है कि वह अध्यादेश जारी कर दे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करना उच्च सदन के प्रति असम्मान होगा।
न्यूज़ एजेंसी भाषा के मुताबिक । राज्यसभा में विपक्ष बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग पर अड़ गया, जिससे सरकार इसे पारित नहीं करा सकी। हालांकि सरकार ने उच्च सदन में इसे चर्चा के लिए रख दिया है और यह फिलहाल उच्च सदन की संपत्ति है।
इस सन्दर्भ में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा में कांग्रेस सदस्य विवेक तन्खा भी मानते हैं कि इस बारे में अध्यादेश लाने के लिए कानूनी तौर पर सरकार के लिए कोई मनाही नहीं है। हालांकि परंपरा यही रही है कि संसद में लंबित विधेयक पर अध्यादेश नहीं लाया जाता। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में कहा था कि सरकार इस विधेयक को इसलिए पारित कराना चाहती है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि इस बारे में 6 महीने के भीतर संसद में कानून बनाया जाए।
इस बारे में विवेक तन्खा का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने 6 माह के भीतर कानून बनाने का जो आदेश दिया था, वह अल्पमत का दृष्टिकोण है। इस बारे में बहुमत वाले दृष्टिकोण में इसका कोई जिक्र नहीं है। आपने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में जल्दबाजी दिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक पर जो रोक लगाई है, वह स्वयं अपने में एक कानून बन चुका है। न्यायाधीश का फैसला अपने आप में एक कानून है। विधायिका तो केवल उसे संहिताबद्ध करती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि झगड़ा फैसले को लेकर नहीं बल्कि सरकार द्वारा इस विधेयक में जो अतिरिक्त बातें जोड़ी गई हैं, उसको लेकर है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया, ‘आप अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसका (तीन तलाक देने के आरोप का) अपराधीकरण कर रहे हैं। विवाह के मामले फौजदारी अपराध नहीं हो सकते।’ तनखा ने कहा कि सरकार ने जल्द पारित कराने के नाम पर इस विधेयक को सिलेक्टकमेटी में भेजने की विपक्ष की मांग को नहीं माना। अब यह विधेयक संसद के अगले सत्र से पहले पारित नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि यदि प्रवर समिति वाली बात मान ली जाती तब भी इस विधेयक को अगले सत्र में ही पारित होना था।