तीन तलाक पर अगले हफ्ते संसद में पेश होगा बिल 3 साल की कैद हो सकती है

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नई दिल्ली =सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अवैध घोषित हुए तीन तलाक को आपराधिक बनाने के लिए केंद्र सरकार अगले हफ्ते संसद में पेश करेगी। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि अगले हफ्ते मुस्लिमवीमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल 2017 और ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए 123वें संविधान संसोधन बिल को संसद में पेश किया जाएगा।
तीन तलाक को आपराधिक घोषित करने के लिए सरकार ने जो मसौदा बनाया है, उसके अनुसार एक बार में तीन तलाक देना अवैध माना जाएगा और इसके लिए पति को 3 साल की जेल भी हो सकती है। इसके जरिए जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एकसाथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी बनाया जाएगा। संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद यह कानून बन जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 22 अगस्त को दिए अपने फैसले में सदियों से चली आ रही इस इस्लामिक प्रथा को मनमाना और असंवैधानिक करार दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों से तीन तलाक दिए जाने की रिपोर्ट्स आ रही हैं। तीन तलाक की शिकायतें मिलने के मद्देनजर केंद्र ने इसका समाधान निकालने का उपाय सुझाने के लिए एक कमेटी बनाई थी। कमेटी में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, के अलावा मुख्तार अब्बास नकवी और दो राज्यमंत्री शामिल रहे।
प्रस्तावित बिल में अपनी पत्नियों को एकसाथ तीन बार ‘तलाक’ बोलकर तलाक देने की कोशिश करने वाले मुस्लिम पुरुषों को 3 वर्ष की कैद की सजा देने और पीड़ित महिलाओं को कोर्ट से गुहार लगाकर उचित मुआवजा और अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांगने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। आधिकारिक डेटा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अगस्त के फैसले के बाद देश भर से तीन तलाक देने के 67 मामलों की रिपोर्ट्स मिली हैं। इनमें से अधिकतर मामले उत्तर प्रदेश के हैं। हालांकि, यह कानून बनने के बाद भी जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होगा।
फोटो सांकेतिक है