बस एक बार मोहे पटवारी बना दीजे………

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ज़हीर अंसारी
एक बड़ा सूबा है। जहाँ का राजा बड़ा ही दयालु और मिर्दुभाषी है। राज्य के जिस हिस्से में राजा जाता है, वहाँ उसकी जय-जयकार होती है। राजा दिखने में सरल व सच्चा है, पर दिमाग़ से चतुर-चालक। राजा की सियासी महारत क़ाबिले तारीफ़ है वह तलवार की धार पर भी संतुलन के साथ दौड़ लेता है। अपनी प्रजा के लिए उसके भाव और विचार संत-महात्माओं जैसे हैं। राज्य की प्रगति के लिए दिन-रात श्रम करता है। सुबह होते ही उड़न-खटोले में बैठकर प्रजा के हाल जानने और विकास की गंगा बहाने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निकल जाता है और देर रात अपनी कुटिया में पहुँचता है। उसने अपने सारे सुख-चैन प्रजा पर न्योछावर कर रखे हैं।

ख़ुशहाल राज्य में एक वर्ष बाद नए राजा का चुनाव होना है, सो वर्तमान राजा ने राज्य के युवाओं को प्रलोभित करने की गरज से तक़रीबन दस हज़ार पद पटवारियों के निकाल दिए। राज्य में सुनहरा आफ़र पाकर लगभग बारह लाख युवाओं ने पटवारी बनने फ़ार्म भर दिए। पटवारी फ़ार्म के लिए सामान्य जाति से पाँच सौ रुपए और एससी,एसटी व ओबीसी से ढाई सौ रुपए शुल्क निर्धारित किया गया। पटवारी आफ़र देख कर पढ़े-लिखे युवाओं की फ़ौज क़तार में लग गई। इंजीनियर, एमबीए, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, टेक्निकल डिग्री होल्डर सब खड़े हो गए लाईन में। हालाँकि इस राज्य में रोज़गार की कोई कमी नहीं है। हर व्यक्ति के पास कई-कई रोज़गार हैं फिर भी इन सब को पता है कि पटवारी की नौकरी में कमाई अच्छी है। एक बार पटवारी बन गए तो गाड़ी-घोड़ा, घर-मकान, बीबी वैगरह का माक़ूल इंतज़ाम हो जाएगा। यही नहीं पटवारी वेकन्सी का सुनकर उन लोगों का मन भी उछाल मारने लगा जो उम्रदराज़ हो चुके हैं। आयु सीमा के बाध्यता की वजह से बेचारे मन मसोस के रह गए।

राजा की नीतियां और पारदर्शिता का पैमाना एकदम साफ-सुथरा था। कोई ऊँगली न उठा पाए इसलिए राज्य के बाहर की फ़र्म को परीक्षा कराने का दायित्व सौंपा गया। राजा के प्रशासनिक चातुर्य से पटवारी परीक्षा फ़ीस के नाम पर मोटे तौर पर पचास करोड़ रुपए इकट्ठा कर लिए गए। सेंटर्स वालों की जेबें भी लबालब हो गईं।

अभी यह पता नहीं चल सका कि कितने बेरोज़गारों को पटवारी का रोज़गार मिलेगा। इसकी पड़ताल चल रही है। इस बीच सोशल मीडिया के किसी विशेषज्ञ ने वफ़ादार जानवर की फ़ोटो पटवारी परीक्षा की तैयारी करते हुए वायरल कर दी।पटवारी बनने को लेकर जोक्स भी ख़ूब चले।

सब तरफ़ एक अजब सी आंधी आई है !
सबने पटवारी बनने की कसम खाई है !