नॉर्थ कोरिया से निपटने की तैयारी,में जापान-अमेरिका और दक्षिण कोरिया

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तोक्यो =उत्तर कोरिया द्वारा एक के बाद एक मिसाइल परीक्षण और इसके तानाशाह किम जोंग उन की धमकियों के बीच अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान अपनी तैयारियों को अंजाम देने में जुटे हैं। तीनों देश साझा रणनीति, सैन्य अभ्यास के साथ मिसाइलों की ट्रैकिंग और उन्हें ध्वस्त करने की तैयारी को पुख्ता कर रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान सोमवार से दो दिवसीय मिसाइल ट्रैकिंग अभ्यास करेंगे। जापान के मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स ने यह जानकारी दी। उत्तर कोरिया द्वारा लगातार हथियारों के परीक्षण को लेकर पैदा हुए तनाव की वजह से यह काफी महत्वपूर्ण है।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने पिछले सप्ताह बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया। इसके बाद उत्तर कोरिया ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु युद्ध को लेकर कोई अगर-मगर वाली बात नहीं है, बल्कि अब यह देखना है कि युद्ध होगा तो कब होगा।
पिछले दिनों उत्तर कोरिया ने अंतर महाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था जो जापान के आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में सागर में गिरा था। इसके बाद 29 नवंबर को उसने अपना अब तक की सबसे उन्नत अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल ह्वासोंग-15 लांच किया था। यह अमेरिका तक पहुंच सकता है।
डिफेंस फोर्स ने बताया कि इस सप्ताह होने जा रहा एक्सरसाइज तीनों देशों के बीच बलिस्टिक मिसाइल्स को ट्रैक करने के लिए सूचनाएं साझा करने वाला छठा ड्रिल है।
अमेरिका चीन और दूसरे देशों पर उत्तर कोरिया के साथ व्यापार खत्म करने का दबाव बना रहा है। अमेरिका द्वारा नए प्रतिबंध लगाए जाने का संकेत के बाद उत्तर कोरिया ने रविवार को कहा कि समुद्री नाकाबंदी युद्ध की घोषणा होगी। उत्तर कोरिया द्वारा हालिया बलिस्टिक मिसाइल लॉन्च किए जाने के बाद अमेरिका ने कहा था कि वह उस पर नए प्रतिबंध लगा सकता है।
सरकारी समाचारपत्र रोडोंग सिनमुन में प्रकाशित एक आलेख के अनुसार, ‘अमेरिका के समुद्री नाकाबंदी के कदम को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे वे एक स्वतंत्र देश की गरिमा और सम्प्रभुता का उल्लंघन करते हैं।’ आलेख में कहा गया, ‘अमेरिका खुलेआम उत्तर कोरिया के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी का कदम उठाने की कोशिश कर रहा है और शांति के समय में इसकी अर्थव्यवस्था का गला घोंटने की कोशिश कर रहा है। यह उत्तर कोरिया के खिलाफ राजनीतिक और आर्थिक नाकाबंदी बढ़ाने की उसकी चाल है, जो दशकों से चली आ रही है।’