तिब्बत चीन से अलग होना नहीं चाहता

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कोलकाता =तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत चीन से स्वतंत्रता नहीं चाहता बल्कि ज्यादा विकास चाहता है। दलाई लामा ने कहा कि चीन और तिब्बत के बीच करीबी संबंध रहे हैं। हालांकि कभी-कभार उनके बीच संघर्ष भी हुआ है। उन्होंने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित संवाद सत्र में ये बातें कहीं।
दलाई लामा ने कहा, ‘अतीत गुजर चुका है। हमें भविष्य पर ध्यान देना होगा। तिब्बती चीन के साथ रहना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम स्वतंत्रता नहीं मांग रहे हैं। हम चीन के साथ रहना चाहते हैं। हम और विकास चाहते हैं।’
दलाई लामा ने कहा कि चीन को तिब्बती संस्कृति और विरासत का अवश्य सम्मान करना चाहिये। उन्होंने कहा, ‘तिब्बत की अलग संस्कृति और एक अलग लिपि है। चीनी जनता अपने देश को प्रेम करती है। हम अपने देश को प्रेम करते हैं।’

FILE PHOTO: Tibetan spiritual leader the Dalai Lama watches a dance performance on the last day of his teachings in Tawang in the northeastern Indian state of Arunchal Pradesh November 11, 2009. REUTERS/Adnan Abidi/File Photo
तिब्बतियों के धर्मगुरु ने कहा कि कोई भी चीनी इस बात को नहीं समझता है कि पिछले कुछ दशकों में क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में देश बदला है। चीन के दुनिया के साथ शामिल होने के मद्देनजर इसमें पहले की तुलना में 40 से 50 फीसदी बदलाव हुआ है। गौरतलब है कि भारत ने दलाई लामा को शरण दे रखी है, जिसका चीन विरोध करता रहा है। दलाई लामा हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं।