जानिये डायबीटीज से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

0
159

मिथक: मीठा खाने से होता है डायबीटीज
सचाई : मीठे से डायबीटीज होने का कोई संबंध नहीं है। इसके लिए वंशानुगत और दूसरे कारण जिम्मेदार होते हैं। हालांकि डायबीटीज हो जाने के बाद मीठा खाने से शुगर अनियंत्रित हो जाती है।
मिथक: ऐल्कॉहॉल का ब्लड ग्लूकोज के लेवल से संबंध नहीं है
हकीकत: नियमित तौर पर ऐल्कॉहॉल के इस्तेमाल से शरीर में यूरिक ऐसिड और ट्राइग्लिसरॉइड बढ़ते हैं। साथ ही शुगर भी अनियंत्रित हो जाता है।
मिथक: डायबीटीज के लिए स्पेशल खाना होता है
सच्चाई: डायबीटीज के लिए कोई स्पेशल खाना नहीं होता बल्कि संतुलित आहार की जरूरत होती है जिसमें 50-60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 15-20 प्रतिशत प्रोटीन और 20-25 प्रतिशत फैट और दूसरे तत्व शामिल हों।
मिथक: शुगर फ्री खाना है समस्या का हल
सच्चाई: शुगर फ्री का मतलब कैलरी फ्री नहीं है। शुगर फ्री के नाम पर जमकर मिठाइयां खाना नुकसानदेह हो सकता है। इनमें खोया, क्रीम आदि की कैलरी भी शामिल होती है जो शुगर अनियंत्रित कर सकती है।
मिथक: डायबीटीज हो तो फल खाना बंद कर दें
हकीकत: डायबीटीज में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल जरूर खाने चाहिए। इनमें सेब, संतरा, मौसमी, अमरूद और पपीता खाएं। चीकू, केला और अंगूर जैसे फल न लें।
मिथक: ड्राई फ्रूट्स खाने से परहेज करना चाहिए
सच्चाई: बादाम और अखरोट जैसे सूखे मेवों से शरीर में गुड कलेस्ट्रॉल यानी HDL कलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है, इसलिए ये चीजें खाएं।
मिथक: डायबीटीज हो तो कम खाना खाएं
सच्चाई: कम खाना सही नहीं है। थोड़ा-थोड़ा खाएं और बार-बार खाएं। न तो ज्यादा देर भूखे रहें और न ही एक बार में ढेर सारा खाना खाएं।
मिथक: डायबीटीज एक उम्र के बाद ही होता है
सच्चाई: डायबीटीज किसी को भी हो सकता है। इन दिनों नवजात और छोटे बच्चों में भी यह समस्या देखी जा रही है। उम्र बढ़ने के साथ
मिथक: डायबीटीज है तो ब्लड डोनेट नहीं कर सकते
सच्चाई: रेड क्रॉस के अनुसार डायबीटीज के मरीज भी एक स्वस्थ इंसान की तरह रक्तदान कर सकते हैं बशर्ते कुछ मानकों को पूरा करते हों।