अथ श्री पैट्रोल कथा/ व्यथा

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नीलकंठ पारटकर

पैट्रोल के दाम ८० रू होते ही देश में सरकार के प्रति उमड़े गुस्से के बाद माई-बाप सरकार ने आधी रात में दो रूपए प्रति लीटर दाम कम कर जनता को भारी राहत दी है लेकिन देशभक्त जनता अभी तक यह समझ नहीं पा रही है आखिर पेट्रोल के दाम में आग क्यों लगी जबकि विश्व स्तर पर दाम स्थिर है। पिछले १५ माह में पेट्रोल पर ११ रूपये ७७ पैसे और डीजल पर १३रू ४७ पैसे एक्साइज ड्यूटी लगाकर कर चटोरी सरकार ने २४२००० करोड़ की पाकिटमारी की। इसके ठीक १५ माह पूर्व यह कमाई महज ९९००० करोड़ थी। सन २०१४ से अब तक मोदी सरकार ने इस इंधन पर नौ बार जजिया कर लगाकर धन बढ़ाया। वर्तमान में पेट्रोल पर प्रति लीटर २१ रू ४८ पैसे और डीजल पर १७ रू ३३ पैसे एक्साइज ड्यूटी है। ४ जुलाई से लूट का नया फंडा डायनामिक प्राइसिंग शुरू हुआ। यानि जुए मटके की तरह रोजाना रेट घोषित होंगे और जनता की ‘कहके ली जाएगी’ लेकिन इसका कोई विरोध नहीं हुआ, दाम सीधे ७ रू ८० पैसे प्रति लीटर बढ़ गए। डीजल भी बढ़ा ५ रू ७० पैसे । नतीजा सब्जी फल और अन्य चीजों के दाम बढ़ गए। गरीबों की सरकार ने सत्ता में आने के बाद अगर कोई महान कार्य कियें है तो तीस फिसदी इनकम टैक्स २८ प्रतिशत जी एस टी ,सफाई सेस, रेल सुरक्षा सेस, प्लेटफार्म और टिकट के दामों में वृद्धि। लक्जरी ट्रेनों और बसों में इजाफा, कर हमारे पाकिट में सेंधमारी की है।अब भक्त कहेंगे दो रूपए प्रति लीटर दाम घटाए भी तो है तो भैय्या हमारे लिए नहीं बल्कि मारोति टाटा जीप के नए कार से सेगमेंट बाजार में उतरें हैं उन्हें बुकिंग नहीं मिल रही है यह बात जब ढाई आदमी की सरकार को पता चली तो रात के अंधेरे में दो कौड़ी की सौगात गरीबों में बंटी। अब दिल से एक ही बात निकलती है हे माई-बाप सरकार बस इतना एहसान करना की कोई एहसान न करना । आपकी गरीब पर मेहरबानी अब बर्दाश्त नहीं होती।

श्री नीलकंठ पारटकर मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार है यह आलेख उनकी फेसबुक वाल से साभार लिया गया है