जितने दिन साथ देना है हार्ट को तो दे दे, वरना राम नाम सत्य तो होना ही है………

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चैतन्य भट्ट
आज यानि २९ दिसंबर को विश्व हृदय दिवस है… वैसे पहले अपन ने कभी दिल दिवस के बारे में कभी सुना नहीं था पर आजकल हर रोज कोई न कोई दिवस मनाया जाने लगा है… कुछदिनों में छिंगली दिवस ,घुटना दिवस, गर्दन दिवस, टखना दिवस, कोहनी दिवस, भोंह दिवस, कमर दिवस, अंगूठा दिवस, आँख दिवस, सर के बालदिवस, और भी ना जाने कौन कौन से दिवस मनाये जाने लगेंगे! खैर बात चल रही थी हृदय दिवस, की शहर के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर में पूरा एक पेज इस दिवस को समर्पित किया गया है और इस पेज पर छपे आलेख में बताया गया है की यदि दिल को स्वस्थ रखना है तो ये सारे उपाय करने चाहिए,अपन ने भी सोचा बुढ़ापा पास आ रहा है जरूरी है कि दिल स्वस्थ रहे सो पूरा आलेख पढ़ डाला…. पर जब सोचने बैठे तो पता लगा की इनमे से कोई भी उपाय इस देश के किसी भी व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है इसमें सबसे पहले लिखा है कि रोजाना 140 ग्राम मेवा खाना है अरे भैया दो जून की रोटी तो मुश्किल हो रही है आजकल खाना मंहगाई के कारण, कंही टमाटर 100 रूपये किलो मिल रहे है तो सब्जियों के भाव आसमान छू रहे है अब किसकी औकात है की वो हजार रूपये किलो काजू और आठ सौ रूपये किलो की बादाम रोजाना खा सके और वो भी थोड़ी बहुत बहुत नहीं पूरे 140 ग्राम यानि 250 रूपये रोज के मेवे, इसलिए ये विचार अपन ने त्याग दिया /
दूसरा उपाय दिया है की 5OO ग्राम सब्जी और फल खाओ, सब्जी आधा किलो भला एक आदमी अकेला कैसे खा सकता है सोचने वाली बात है रहा फल का सवाल तो कंही सेब को चमकदार बनाने के लिए उसमें मोम की पालिश की जा रही है तो कंही पपीता और केले को पकाने के लिए उसमे इंजेक्शन ठूंसा जा रहा है ऐसे जहरीले फल खाकर दिल ठीक होना तो दूर कब हार्ट अटेक आ जाये कहना मुश्किल है सो ये दोसरा उपाय भी गया हाथ से ……..
तीसरा उपाय बताया गया है गुस्सा न करो, अब कोई इनसे पूछे की इतनी परेशानियों इतनी झंझटों के बीच आदमी गुस्सा न करे क्या या संभव है लड़का एक ही कक्षा में दो दो साल लगा रहा है लड़की की शादी नहीं हो पा रही है घर का खर्चा पूरा पड़ नहीं रहा है बिजली का बिल हजारो में आ रहा है नगर निगम हर साल सम्पति कर बढाती जा रही है ऑफिस में रोज बॉस डांट रहा है ऐसे में कौन सा ऐसा संत पैदा हो गया है जो अपने गुस्से पर काबू कर ले तो इस उपाय से भी तौबा ……….
जम कर हँसे एक ये भी उपाय बताया गया है ये भी कोई बात हुई हंसाने और हंसने लायक छोड़ा कंहा है मोदी सरकार ने पहले नोट बंदी फिर जीएस टी और अब पता नहीं कौन सी नई स्कीम लेकर आने वाले हैभाई जी , पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे है पेट्रोल डलवाने जाओ तो ऐसा महसूस होता है की पेट्रोल नही बल्कि अपने जिस्म का खून गाड़ी में डलवा रहे है ऐसे में भलाकोई कैसे हंस सकता है सकता है हां मोदी जी जरूर हंस सकते है पर वो भी 2019 तक, उसके बाद क्या होगा ये वक्त ही बताएगा……..
पांचवा उपाय है की हमेश परिवार के पास रहो, अपनी तो समझ से बाहर है कि जिन लोगो ने भी ये सलाह दी है उन्हें वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है क्या ,परिवार अब बचे कंहा है संयुक्त परिवार अब सपना हो गए है फैमिली के नाम पर पति पत्नी और बच्चे ,खर्चा इतना है की दोनों ना कमाए तो महीना पूरा नहीं पड़ता, अब बीबी कंही पोस्टेड है और हस्बैंड कंही दूसरी जगह लड़का बाहर पद रहा है तो बिटिया कंही दूसरी जगह नौकरी कर रही है ऐसे में कैसे परिवार के साथ रहे आदमी, ये जवाब तो करोड़पति में पूछे जाने वाले सवाल के उत्तर जैसा है
वाक करे…. ये भी कहा है उन लेखकों ने अब वे ही बताये की कहा वाक करे आदमी, बाग़ बगीचे बचे नहीं है, फुटपाथ पर अतिक्रमण है सड़को पर गंदगी और धूळ का अम्बार है ऐसे में घूमे तो घूमे कंहा, दूसरी बात भरी जवानी में तो घुटनो में दर्द शुरू हो गया है अब ऐसे घुटने लेकर कोई इंसान कैसे घूम सकता है ये ही सोचने वाली बात है इसके अलावा भी कुछ और उपाय बताये गए है पर सच्ची बात तो ये है ये पूरे नहीं हो सकते
इसलिए भैया अपना ने तो लेख पूरा पढ़कर सोच लिया की ये सारे उपायों को अपनाना डॉन को पकड़ने की तर्ज पर मुश्किल ही नहीं असंभव इसलिए जितने दिनों तक हार्ट को साथ देना है दे नही तो राम नाम सत्य तो एक न एक दिन होना ही है दो छार साल पहले हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ता है /