गद्दार राजघराने से यारी क्यों ………?

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जहीर अंसारी
हमारे मुल्क में बहुत सारे इतिहास हो गए हैं| जिसे देखो वही अतीत के खजाने से नई-नई घटनाओं को खोज लाता है और अपनी सुविधानुसार तोड़-मरोड़ कर परस देता है| नेताओं का इतिहास ज्ञान भी काफी बढ़ गया है| जब वो इतिहास पर ज्ञान बघारते हैं तो वास्तविक इतिहासकार भी शरमा जाते हैं और पुराने किताबों में नेताओं की कही बातों को खोजने में लग जाते हैं|

नेताओं के इतिहास ज्ञान पर टिप्पणी करना ठीक न होगा| ये जल्दी बुरा मान जाते हैं, इनके अहंकार को फटाक से चोट पहुंच जाती है| इन्हें तो सिर्फ
इतना याद दिलाना उपयुक्त होगा कि नेताजी आप तो चुनाव में अपनी रसभरी जुबान से भविष्य के सपनों का खाका समझाया था| जनता की उम्मीदों का महल अगले पांच सालों में कैसे खड़ा करेंगे, यह बताया था| लेकिन यह क्या, चुनाव जीतने के बाद आप इतिहास की बीमारी से ग्रसित हो गए| नेताजी आप फिर बताने लगे पहले वालों ने क्या-क्या गलतियां की| कैसे-कैसे देश-प्रदेश का माल डकारा| यह सब जनता को मालूम था तब तो जनता ने उनके बदले आपको अपनी
रहनुमाई इस आशा से सौंपी थी कि आप कुछ नया करेंगे| आप हैं कि प्राथमिक कक्षा में पढ़ाए जाने वाले इतिहास दोहराये जा रहे हैं| अरे नेताजी, आपको तो इसलिए चुना गया था कि आप कुछ ऐसे करेंगे जो भविष्य के इतिहास में दर्ज
किया जाएगा लेकिन आप गडे मुर्दे उखाड़ने में ही वक्त जाया कर रहे हैं|

हॉल ही एक प्रदेश के मुखिया ने ग्वालियर राजघराने की पोथी फिर से खोल कर पढ़ दी| इस पोथी को मुखिया जी इसी साल मार्च में एक विधानसभा के चुनाव में पहले भी पढ़ चुके हैं| आजादी के पहले या अंग्रेजकॉल में इस राजघराने
की क्या भूमिका थी उसका ताल्लुक आजाद हिन्दुस्तान से तो अब न रहा| उस दौर की पीढ़ी भी मर-खप गई, फिर क्यों बार-बार मरे हुए लोगों पर आक्रमण किया जा रहा है| आक्रमण करना ही तो ग्वालियर राजघराने के जो लोग जिंदा हैं और
राजनीति कर रहे हैं उन पर आक्रमण करना चाहिए| मुखिया जी जिस राजघराने को आप गद्दार बता रहे हैं उसी राजघराने की राजमाता ने तो आपकी पार्टी का खड़ा किया था| इसी गद्दार परिवार के दो बेटियां भी हैं| बड़ी बेटी आपकी
की तरह एक राज्य की मुखिया है और दूसरी बेटी आपके कबीना में आपकी साथी है, जिसके साथ आप बैठकर हर सप्ताह नीति निर्धारण करते हैं|

अरे मुखिया जी जब इस राजघराने पर गद्दारी (जैसे आप कहते हैं) का तगमा लगा है तो इनसे तमाम रिश्ते खत्म क्यों नहीं कर लेते| उन्हें बार-बार जलील करने से आप भी बच जाएंगे और आप निंदक न कहलाएंगे|