गुजरात की नौकरशाही में एक ही व्यक्ति की चर्चा

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अहमदाबाद =गुजरात की नौकरशाही में पिछले डी दिनों से एक ही व्यक्ति की चर्चा है और व है मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोति जिन्होंने सत्ताधारी बीजेपी के विरोध से बेअसर रहकर दो बागी कांग्रेसी विधायकों की वोटों को खारिज कर दिया। हालांकि, जिन अफसरों ने जोति के साथ काम किया है, उनका कहना है कि बेहद मृदुभाषी जोति नियमों से चलने वाले इंसान हैं। जोति 1975 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अफसर हैं। उन्होंने गुजरात के चीफ सेक्रटरी के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।
मंगलवार को जब कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में अपने दो विधायकों के बीजेपी के पक्ष में दिए गए वोटों को खारिज करने का मुद्दा उठाया तो गांधीनगर में बैठे जोति के जूनियर समझ गए यही कि नतीजे आते-आते रात हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि जोति ‘शब्द दर शब्द रूल बुक के हिसाब से चलेंगे।’अंगरेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया ने जोति से संपर्क करके पूछा कि उन्होंने गुजरात राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस हाई प्रोफाइल विवाद को कैसे सुलझाया तो उन्होंने कहा, ‘हमने शिकायत की जांच करने के बाद कानूनी पक्ष पर विचार किया। हमने दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों की बातें सुनी। रिटर्निंग अफसर की रिपोर्ट पर विचार किया और विडियो रिकॉर्डिंग भी चेक किया। इसके बाद हमने दोनों वोटों को कैंसल करने का फैसला किया।’ जोति ने बताया कि वोटों को अवैध घोषित करने से पहले आयोग ने कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया। आयोग ने मिलते-जुलते मामलों पर जारी पिछले सर्कुलरों का अध्ययन किया।
जनवरी 2010 में गुजरात का चीफ सेक्रटरी बनने से पहले जोति ने सरदार सरोवर नर्मदा निगम की अगुआई की। जनवरी 2013 में रिटायर होने के बाद उन्होंने गुजरात विजिलेंस कमिश्नर के तौर पर सेवाएं दीं। जोति के एक जूनियर आईएएस सहकर्मी ने 2009 का एक वाकया बताया। जोति उस वक्त सुर्खियों में आ गए थे, जब तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया कि वह जोति को राज्य का अगला चीफ सेक्रटरी बना सकते हैं। मोदी ने तत्कालीन एसीएस (होम) बलवंत सिंह को नजरअंदाज कर जोति की जमकर तारीफ की थी। मोदी ने यह तारीफ जोति के ग्रामीण इलाकों में देर शाम तक ठहरने को लेकर की थी।
बताया जाता है की मंगलवार देर रात तक दो कांग्रेसी विधायकों के वोट का विवाद दिल्ली पहुंच चुका था। कांग्रेस का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तीन बार आकर दो विधायकों के वोट रद्द करने की मांग कर चुका था, तो केंद्रीय मंत्रियों से सजा बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल आयोग से तत्काल वोटिंग करवाने की मांग कर रहा था। इन सबके बीच आयोग के सामने तुरंत फैसला लेने की चुनौती थी, क्योंकि राज्यसभा चुनाव की मतगणना वोटिंग के तुरंत बाद करने की संवैधानिक परंपरा रही है। आयोग के लिए फैसला लेने में बाधक कांग्रेस और बीजेपी के नेता बन रहे थे, जो एक के बाद एक प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां पहुंच रहे थे। आयोग ने कांग्रेस और बीजेपी नेताओं को डांट भी पिलाई और रात 9:30 बजे के बाद आयोग ने साफ कह दिया कि वह अब किसी प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेगा।

सबसे पहले आयोग ने अहमदाबाद से चुनाव की विडियो रिकॉर्डिंग मंगवाई। फिर आयोग की पूरी टीम ने कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। विडियो में साफ दिख रहा था कि कांग्रेस के दो बागी विधायक अपना वोट दिखा रहे थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद आयोग ने कानूनी जानकारों से तुरंत राय ली। इसके बाद आयोग ने पिछले एक साल के अंदर लिए गए दो फैसलों को फिर से परखा। यह था हरियाणा और राजस्थान में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन वोटों को इसी आधार पर रद्द करना। दोनों सीटों में तीन वोट रद्द किए गए थे। दिलचस्प है कि तब आयोग के फैसले का शिकार कांग्रेस हुई थी और पार्टी आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट भी गई, जहां उसे हार मिली। लेकिन उस समय की वही हार कांग्रेस के लिए मंगलवार देर रात जीत का आधार बनी।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि यह साफ मामला था जहां सिर्फ विडियो में देखना था कि क्या विधायकों ने अपने वोट पोलिंग एजेंट के अलावा किसी को दिखाया है या नहीं। अगर इसके प्रमाण मिलते हैं तो फिर फैसला लेना बेहद आसान था।