जबलपुर के एडवोकेट विवेक पांडे के ’आईडिया’ को शिकागो यूनिवर्सिटी ने पब्लिश किया…….

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ज़हीर अंसारी
दुनिया में मैथ्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री व इकानॉमिक आदि के स्थापित सिद्धांत है| इन सिद्धांतों के आधार पर शिक्षण तथा अविष्कारिक अनुसंधान किए जाते है| जैसे गणित का सिद्धांत है कि दो और दो चार होंगे| यानि पूरे दुनिया में यही फार्मूला प्रचलन में है अर्थात दो और दो चार ही होंगे तीन या पांच नहीं| मगर विधि और न्याय शास्त्र में ऐसा कोई एकीकृत सिद्धांत नहीं है जो समूची दुनिया में मान्य हो| देश, काल, परिस्थिति और धर्म के अनुसार सबका अपना-अपना विधि और न्याय शास्त्र है| इस विसंगति को दूर करने और एकरुपता स्थापित करने का प्रयास विश्व के शीर्ष विद्वान काफी दिनों से कर रहे हैं लेकिन अब तक किसी को सफलता नहीं मिली है|

सारी दुनिया के विद्वान इस विषय पर माथा खपा रहे हैं, ऐसे में जबलपुर शहर के पेशेवर वकील विवेक रंजन पांडे ने कल्याणकारी विधि-न्याय शास्त्र के सिद्धांत का ‘आईडिया’ कोई 7-8 बरस पहले तैयार कर लिया था| विवेक रंजन पांडे लगातार इस सिद्धांत को सर्वमान्य बनाने के लिए प्रयासरत रहे| चूंकि भारत में किसी भी विषय के सैद्धांतिकरण को गंभीरता से नहीं लिया जाता लिहाजा उनके ’आईडिया’ को यहां महत्व नहीं मिला| विवेक रंजन पांडे ने जब अपना यह आईडिया’ किसी वरिष्ठ विद्वान के जरिये अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी भेजा तो उन्हें यह ’आईडिया’ पसंद आया| शिकागो यूनिवर्सिटी ने इंवीटेशन के साथ वीजा भेजकर उन्हें आमंत्रित कर लिया| एडवोकेट पांडे ने अपने इस ’आईडिया’ का प्रजेंटेशन यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र और गणित शास्त्र के विद्वानों के समक्ष दिया तो उन्हें कल्याणकारी विधि शास्त्र का यह ’आईडिया’ पसंद आया| एडवोकेट पांडे ने अपने इस ‘आईडिया’ का शीर्षक ‘कानून के आर्थिक विश्लेषण में कल्याणकारी न्याय शास्त्र’ दिया है|

पारंपरिक न्याय के किसी सिद्धांत में न्याय का कोई पुख़्ता सिद्धान्त नहीं है। पारंपरिक न्याय भावनात्मक विचार अथवा प्रभु शक्ति द्वारा शासन करने की धमकी या डर के आधार पर होता है जबकि कल्याण न्याय शास्त्र अवधारण यह कि मनुष्य के कल्याण के अच्छे स्तर के लिए ऐसा सिद्धांत बनाया जाए जिसमें विधि और न्याय के सिद्धांत एकजुट हों जो लोगों की भलाई में मलहम का काम करे। एडवोकेट विवेक रंजन पांडे के इस ’आईडिया’ को अहमियत देते हुए यूनिवर्सिटी आफ शिकागो लॉ स्कूल विस्तृत सिद्धांत प्रतिपादित करने का दायित्व सौंपा है| उनके इस कार्य में अमेरिका और यूरोप के बड़े-बड़े विद्वान सहयोग प्रदान करेंगे| इस कार्य को प्रमोट करने के लिए यूनिवर्सिटी आफ शिकागो लॉ स्कूल ने कमिटमेंट किया है| एडवोकेट पांडे ने जो पहला पेपर तैयार किया था उसे यूनिवर्सिटी आफ शिकागो लॉ स्कूल ने WORKING PAPER ON THE WELFARE JURISPUDENCE IN ECONOMIC ANALYSIS OF LAW अपनी वेब साईट पर लोड कर दिया है| इसे विवेक रंजन पांडे के नाम से गूगल पर भी सर्च किया जा सकता है| इस पब्लिकेशन के बाद अब विवेक पांडे को विस्तृत थ्योरी तैयार करना होगा|

यहां यह बताना जरुरी है कि विवेक रंजन पांडे एमपी हाईकोर्ट में प्रेक्टिस करते हैं| अच्छे वकील के साथ अच्छे स्कालर्स भी हैं| यहां उनकी क्षमताओं को अंडर स्टीमेट किया जाता रहा है| वजह साफ थी कि जिस वैश्विक विचार को मतलब थ्योरी आफ लॉ और थ्योरी आफ जस्टिस को एकीकृत करने की सोच को अधिकांशत: लोग समझ नहीं पाए|

विवेक रंजन पांडे की इस उपलब्धि में उन्हें अनंत शुभकामनाएं| उन्होंने जबलपुर के नाम को गौरवान्वित किया है।