मराठा समुदाय के सड़को पर उतरने से थमी मुम्बई

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मुंबई =शिक्षा और नौकरी में आरक्षण के साथ अपनी कई मांगों के समर्थन में महाराष्ट्र का मराठा समुदाय मुंबई में सड़कों पर उतर आया भायखला जू से आजाद मैदान तक हजारों की तादाद में मराठा समुदाय के लोगों का मार्च शुरू हो चुका है। मार्च में बड़ी तादाद में युवा शामिलथे जिसमें महिलाओं की भी अच्छी-खासी तादाद थी मार्च के रूट से लगे मार्गों पर ट्रैफिक जाम हो चुकाथा । मार्च के आयोजक मराठा क्रांति मोर्चा का दावा है कि इस मार्च में प्रदेशभर से करीब 6 लाख मराठा शामिल हुए पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में भी महाराष्ट्र के तमाम जिलों में मराठा समुदाय के लोगों ने लाखों की तादाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था।
मराठा समुदाय नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहा है। इसके अलावा समुदाय की प्रमुख मांग है कि पिछले साल अहमदनगर के कोपर्डी में नाबालिग के गैंगरेप और मर्डर के आरोपियों को फांसी की सजा दी जाए। यह मामला अभी कोर्ट में लंबित है। समुदाय दलित उत्पीड़न रोकथाम कानून में भी बदलाव की मांग कर रहा है क्योंकि उसका आरोप है कि इस कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।
माना जाता है कि मराठा आंदोलन में लाखों लोगों के हिस्सा लेने के पीछे पिछले साल अहमदनगर के कोपर्डी में एक नाबालिग की गैंगरेप के बाद मर्डर की वारदात है। इस वारदात के बाद समुदाय में जबरदस्त आक्रोश फैला जिसके बाद पिछले साल लाखों की तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। पिछले साल 13-14 जुलाई को अहमदनगर जिले के कोपर्डी गांव में एक मराठा लड़की लापता हो गई थी। बाद में गांव के एक खेत में उसका शव मिला था। गैंगरेप के बाद लड़की को मार डाला गया था। कोपर्डी कांड के आरोपी दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। यही वजह है कि इस कांड के बाद मराठाओं में दलितों के प्रति भी आक्रोश बढ़ा। शायद यही वजह है कि समुदाय एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून में बदलाव की मांग कर रही है।
यूं तो मराठा क्रांति मोर्चा इस आंदोलन के पीछे है लेकिन इतने बड़े आंदोलन का कोई चेहरा नहीं है, कोई नेता नहीं है। हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन के उलट मराठा आंदोलन अब तक अहिंसक रहा है। आज का मराठा मार्च भी शांतिपूर्ण मार्च है और इसे मुंबई का अबतक का सबसे बड़ा साइलेंट मार्च बताया जा रहा है।
महाराष्ट्र की कुल आबादी में करीब 33 प्रतिशत मराठा हैं। 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि मराठाओं को पिछड़े वर्ग में नहीं गिना जा सकता। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय राजनीतिक तौर पर काफी प्रभावशाली है। कोई भी राजनीतिक दल इनकी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी यही वजह है कि सूबे की देवेंद्र फडणवीस सरकार के लिए इस आंदोलन से निपटना चुनौती बन गई है।