फिर तो पुष्पक विमान में उड़ना चाहिए………..

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ज़हीर अंसारी
सुना है कि उनके पास वक़्त की बहुत कमी हो गई है। आसमान में उनका बहुत वक़्त बर्बाद होता है। सरकारी बेड़े में जो विमान और हेलीकाप्टर हैं वह सभी कन्तरी हो गए हैं। प्रदेश को स्वर्णिम बनाना है इसलिए हवाई जहाज़ हाई स्पीड वाला होना चाहिए। शायद इसीलिए वो हाई स्पीड ऐरोप्लेन किराए पर ले रहे हैं। इस विमान के लिए दिल्ली की कंपनी को आठ करोड़ रुपए हर साल दिए जाएँगे। अब सरकार के पास इतनी पूँजी भी नहीं बची कि पुराना विमान बदलकर नया विमान ख़रीदा जा सके।

वैसे उन्होंने यह फ़ैसला बड़ा सोच-समझकर लिया है। अगले साल चुनाव जो होना है। लाज़िमी है देश-प्रदेश की राजधानी के अलावा और कहीं भी आना-जाना पड़ेगा। पुराने जहाज़ में उड़-उड़ के उसका कबाड़ बना दिया है। देश और प्रदेश बदल रहा है तो हवाई जहाज़ बदलने की तो बनती है। बदल लो जी अपना क्या जाता है। जाएगा जनता की जेब से। जनता कमा ही रही है सरकार के लिए अब आप चाहे साधारण विमान में उड़ो या फिर जेट विमान में सर तो जनता का ही मूँड़ना है। कमाल देखिए कि जो जेट विमान किराए पर लिया जा रहा है वो उड़े न उड़े आठ करोड़ रुपए सालाना तो देना ही होगा। अगर उड़ानें ज़्यादा हुई तो उसका अलग चार्ज लगेगा। अच्छा ही किया उन्होंने किराए पर जेट विमान लेकर जनता के सौ करोड़ रुपए को फ़िलहाल बचा लिया क्योंकि इस जेट की क़ीमत क़रीब-क़रीब इतनी होगी। यह बात अलहदा है कि प्रदेश के कुछ ही शहर ऐसे एयरपोर्ट हैं जहाँ इस विमान का आवागमन संभव है।

हालाँकि जेट विमान में उड़ने का फ़ैसला करने में उन्होंने दशक भर से ज़्यादा वक़्त लगा दिया। यह फ़ैसला तो उन्हें बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था, सुस्त रफ़्तार जहाज़ में बेवजह हज़ारों घंटे बर्बाद चले गए। यदि इतना वक़्त फ़िज़ूल न जाता तो निश्चय ही वह प्रदेश स्वर्णिम बन गया होता। ख़ैर अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। जब जागो तब सवेरा की तर्ज़ पर जेट विमान की तेज़ गति की वजह से जो समय बचेगा उसका उपयोग किसी नए सेवा प्रकल्प या यात्रा के काम आएगा।

जिस तरह से उनके ऊपर चौतरफा दबाव है और उन्हें बे-इंतहा भागदौड़ करनी पड़ती है उसके हिसाब से जेट विमान भी बेकार ही साबित होगा।उन्हें तो पुष्पक विमान लेना चाहिए जो मन की गति से भी तेज़ उड़ सके। वैसे भी अब ‘गति’ मूल्याँकन का आधार बन गया है। किसी ‘गति’ को प्राप्त हों उसके पहले ही मन की गति से उड़ने वाले विमान में बैठकर भगवान रूपी जनता के पास पहुँचकर सेवा कर लें, न जाने आगे क्या ‘गति’ हो!

ज़हीर अंसारी