अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी माँगी

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नई दिल्ली =अदालत में शपथ लेकर गलत बयान देने और कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के मामले में बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष व बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर अनुराग ठाकुर की ओर से माफीनामा पेश किया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
एक पन्ने के अपने हलफनामे में अनुराग ठाकुर ने कहा है कि कुछ गलत सूचना और गलतफहमी की वजह से ये हुआ और वह बिना किसी शर्त के साफ शब्दों में माफी मांगते हैं। अदालत के प्रतिष्ठा को कभी उन्होंने कम नहीं समझा है। अदालत मामले में शुक्रवार को सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 जुलाई को बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर से कहा था कि वह बिना शर्त स्पष्ट माफीनामा पेश करें। सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से कहा था कि वह एक पेज का हलफनामा पेश करें जिसमें बिना शर्त माफी हो। पहले उनकी ओर से जो हलफनामा पेश किया गया है उसे कोर्ट स्वीकार नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलक व डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि पहले से उनकी ओर से माफी को लेकर जो हलफनामा पेश किया गया है उस पर कोर्ट विचार नहीं करने जा रही है।
अदालत ने कहा था कि अनुराग ठाकुर को एक और मौका दिया जा रहा है और सलाह दी जा रही है कि वह एक पेज का हलफनामा पेश करें और बिना शर्त माफी की बात हो और वह भी स्पष्टता के साथ हो। सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से कहा था कि वह 14 जुलाई को कोर्ट के सामने पेश हों।
कोर्ट ने संकेत दिया था कि माफीनामा स्वीकार कर कंटेप्ट की कार्रवाई बंद कर सकती है। अनुराग ठाकुर के वकील पीएस पटवालिया ने कहा था कि उनके क्लाइंट बिना शर्त माफीनामा देने के लिए तैयार हैं साथ ही कहा था कि उनका केस मेरिट पर बेहतर केस था और वह साबित कर सकते थे कि क्लाइंट ने गलत नहीं किया है।
क्रिकेट सुधार के लिए बनाई गई लोढा कमिटी की सिफारिशों को लागू नहीं किए जाने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में लगता है कि बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर ने अदालत में शपथ लेकर गलत बयान दिया है और ऐसे में कोर्ट अनुराग ठाकुर के खिलाफ परजरी (अदालत में शपथ लेकर गलत बयान देना) की कार्रवाई के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है।
अदालत ने कहा कि ठाकुर ने बीते साल 18 जुलाई के आदेश के पालन में बाधा डाली है और कहा कि आदेश का पालन वह नहीं करा सकते और ऐसे में अपनी ड्यूटी से पल्ला झाड़ा। अदालत ने कहा कि ऐसे में कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के मामले में नोटिस जारी किया जाता है और अदालत ने पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अदालती अवमानना के मामले में कार्रवाई की जाए।