चीन से निपटने के पहले ये भी तो सोचें

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मनीष तिवारी
चीन के साथ साथ देशी चीनियों को भी गाली देने का मन कर रहा है। जिनके कारण देश में उद्योग व्यापार नहीं पनप पा रहा।
आप अगर छोटी से छोटी फैक्टरी खोलना चाहो तो 3 चार साल तो सिर्फ NOC लेने में लग जायेंगे।
कितनी आपत्तियां, कितनी विपत्तियां कि आप सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाते लगाते निराशा से भर जायेंगे।
जरा विचार करो हमारे घर में सुप्रभात और शुभ रात्री चीनी वस्तुओं से ही हो रही है इसका जिम्मेवार कौन है।
हमें पूरी दुनिया में व्यापार करना चाहिए पर हम पूरी दुनिया को व्यापार करने बुला रहे है।
हमारी देश की प्रतिभा पलायन कर रही है और हम आरक्षन् के दम पर अंतरिक्ष जीतना चाह रहे।हमने वोट के लिए ऐसे सिस्टम को ईजाद कर दिया की एक पूरी की पूरी श्रमशील कौम को अकर्मण्य बना दिया, घर में रहो और 1 रु किलो गेंहू चावल खाओ मध्यम वर्गीय और अमीर लोग टेक्स दे रहें हैं तुम्हें भी पालेंगे हमें भी पालेंगे।
अरे भाई प्रत्येक व्यक्ति के लिया श्रम अनिवार्य कीजिये जो जिस लायक है उस स्तर पर देश के लिए श्रम करे।
हम चीनी माल का बहिष्कार करते हैं और देश की सरकार, अफसरशाही, नागरिकों से आग्रह करते हैं देश के लिए विचार करें देश के लिए कार्य करें। सरकार नीतियों को सहज बनाये।
सबमें स्वाभिमान के भाव को जिंदा करे अनुदान दे पर देश के लिए उसकी वापसी भी सुनिश्चित हो तभी हम दुनिया के साथ चल पाएंगे। चीन भारत से 1 वर्ष बाद आज़ाद हुआ और दुनिया को आँखे दिखा रहाहैं हम पूरी दुनिया से भीख मांग रहे हैं। हमें हथियार दे दो, हमें औज़ार दे दो, हमें टेक्नोलॉजी दे दो, हमें क़र्ज़ दे दो, हमारे यहाँ इंडस्ट्री डाल लो मज़ाक बना के रख दिया। स्वाभिमान को घोर के पी गये।
दुनिया भर के सामने हाथ फैलाओगे तो दुनिया अपने हिसाब से व्यवहार करेगी देश के लोगो में स्वभिमान जगाओ, आत्म निर्भर बनने प्रेरित करो, श्रम करने के रास्ते दिखाओ सरकारी व्यवस्था को दुरुस्त करो फिर चीन की चाईं चूँ करो।
सभी देशवासियों से निवेदन है कि अपने घरों से धीरे धीरे चीनी वस्तुओं को चिता पर रखना प्रारम्भ करें और भारतीय व्यापारियों द्वारा निर्मित वस्तुओं कोखरीदें ताकि हम राष्ट्र उन्नति में सहायक हो सकें।

मनीष तिवारी जबलपुर