क्या कहती हैं रामनाथ कोविंद की जन्म कुंडली–

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पंडित दयाननद शास्त्री
,एनडीए द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनका नाम चर्चा में है। अखबार, टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया में उनके बारे में चर्चा हो रही है। देश के राष्ट्रपति पद हेतु 17 जुलाई, 2017 को मतदान होगा तथा 20 जुलाई, 2017 को परिणाम घोषित होगा।

श्री रामनाथ कोविंद की जन्म कुंडली में राष्ट्रपति बनने के प्रबल योग हैं। रामनाथ कोविंद का जन्म उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था।
मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्मे है कोविंद , मीन लग्न व धनु राशि की कुंडली में तृतीय स्थान का राहु व भाग्येश मंगल सप्तम स्थान में स्थित हो अप्रत्याशित राजयोग उत्पन्न करवा रहें हैं। बृहस्पति- शुक्र की युति इनमें सहज, सरल व विद्वान व्यक्तित्व बना रहे हैं।
कोविंद की कुंडली में जनवरी, 1991 में उनकी राहु की महादशा प्रारंभ हुई, जिसमें राजनैतिक सफलता के संकेत हैं। सशक्त स्थान में स्वगृही सूर्य के साथ बुध की युति व अष्टम में बृहस्पति-शुक्र की युति वृहत्पराशर होरा शास्त्र के अनुसार प्रबल राजयोग बना रहे हैं। अगस्त, 2015 में बृहस्पति की महादशा में बुध की अंतर्दशा में उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया। वर्तमान में बृहस्पति महादशा में शुक्र अंतर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा चल रही हैं, जो देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान कराएंगे।
बृहस्पति लग्नेश व दशमग हैं। इस कारण अत्यंत शुभ परिणाम प्रदान करा रहे हैं। सितंबर, 2022 तक का समय बेहद अनुकूल है, इस दौरान देशहित में ऐतिहासिक फैसले लेंगे। देश का मान-सम्मान बढ़ाएंगे। ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय हैं। मतदान के दिन सूर्य की अनुकूलता तथा परिणाम के दिन चंद्रमा की अनुकूलता उन्हें सर्वोच्च पद पर विराजमान कराएगी।
रामनाथ कोविंद की कुंडली में राष्ट्रपति बनने के प्रबल योग हैं। मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्मे है कोविंद , मीन लग्न व धनु राशि की कुंडली में तृतीय स्थान का राहु व भाग्येश मंगल सप्तम स्थान में स्थित हो अप्रत्याशित राजयोग उत्पन्न करवा रहें हैं। बृहस्पति- शुक्र की युति इनमें सहज, सरल व विद्वान व्यक्तित्व बना रहे हैं। कोविंद की कुंडली में जनवरी, 1991 में उनकी राहु की महादशा प्रारंभ हुई, जिसमें राजनैतिक सफलता के संकेत हैं। सशक्त स्थान में स्वगृही सूर्य के साथ बुध की युति व अष्टम में बृहस्पति-शुक्र की युति वृहत्पराशर होरा शास्त्र के अनुसार प्रबल राजयोग बना रहे हैं। अगस्त, 2015 में बृहस्पति की महादशा में बुध की अंतर्दशा में उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया।
वर्तमान में बृहस्पति महादशा में शुक्र अंतर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा चल रही हैं, जो देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान कराएंगे। बृहस्पति लग्नेश व दशमग हैं। इस कारण अत्यंत शुभ परिणाम प्रदान करा रहे हैं। सितंबर, 2022 तक का समय बेहद अनुकूल है, इस दौरान देशहित में ऐतिहासिक फैसले लेंगे। देश का मान-सम्मान बढ़ाएंगे। ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय हैं। मतदान के दिन सूर्य की अनुकूलता तथा परिणाम के दिन चंद्रमा की अनुकूलता उन्हें सर्वोच्च पद पर विराजमान कराएगी।