एंजियोप्लास्टी ओर बाईपास = ये न समझे की आप रोगमुक्त हो गए

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डॉ अनिल गुप्ता
जिस तेजी से ह्रदयाघात के मरीज बढ़ रहे है। आप तीन चीजों एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी ओर बाईपास सर्जरी का जिक्र जरूर सुनते होंगे।
आज हम समझते है की ये हैं क्या?
खून की नसों की जांच को हम एंजियोग्राफी के नाम से जानते है। इसमें खून की धमनियों में एक विशेष दवा इंजेक्ट करते हुए नसों की फ़िल्म बनाई जाती है। जांच के द्वारा हम नसों की खराबी ओर रुकावट या ब्लॉक को देख पाते हैं।
धमनियों के ब्लॉक को फुग्गे से फुलाकर नसों को खोलने की प्रक्रिया को एंजियोप्लास्टी कहते है। फुग्गा निकालने के बाद फिर से ब्लॉक न हो जाये ओर धमनी लम्बे समय तक खुली रहै इसलिए एक विशेष छल्ला डाल दिया जाता है इसे स्टेंट कहते है।
अगर नस को फुग्गे से नही फुलाया जा सकता है या ऐसा करना रिस्की है तब एक नई नस इस ब्लॉक के आगे से निकाल कर ब्लॉक के बाद जोड़ दी जाती है। इस तरह से ब्लॉक को बाईपास कर दिया जाता है।इस सर्जरी को बाईपास सर्जरी कहते है।
अब दूसरी बात
क्या एंजियोप्लास्टी, एंजियोग्राफी या बाईपास सर्जरी कराने के मायने आपका ठीक होना है?
एक बात अच्छी तरह से समझ ले एंजियोग्राफी एक जांच है यह इलाज का हिस्सा है पर खुद इलाज नहीं है।
अब बात करते हैं एंजियोप्लास्टी ओर बाईपास सर्जरी की। आप ने अब तक पढ़ लिया होगा एंजियोप्लास्टी में ब्लॉक को खोलते ही ओर बाईपास में उस ब्लॉक को बाईपास करते है। इसका मतलब है कि जो असल बीमारी है वो जहाँ की तहाँ है।
आपको तुरंत तकलीफों से मुक्ति मिलेगी क्योंकि ब्लॉक खुलने या बाईपास होने से आगे रक्त संचार बढ़ जाता है। पर हम मर्ज को खत्म नही करते है। इसलिए एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के बादये न समझे कि आप रोगमुक्त हो गए हैं। हाँ आप तकलीफों से मुक्त हो गए हो और एक नई जिंदगी जीने के लिए तैयार हो।
अब इस नए जीवन में फिर बही गलतियों को न दोहराएं जिनने आपको इस मुकाम पर पहुंचाया है। परहेज करें, नशे बन्द करें, पैदल चलें ओर अपने चिकित्सक से नियमित परामर्श ले। अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप ठीक हो गए हैं तो यह आपकी भूल होगी।
अगर आप एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के बाद पुराने ढर्रे पर चले तो फिर तकलीफ चालू होने में ज्यादा समय नही लगेगा। और एक बात इस बार बीमारी पिछली बार से ज्यादा होगी। याद है न पिछली बीमारी तो बहीं थी। वो तो जस की तस रहेगी पर अब ये तकलीफ पुराने मर्ज बढ़ने या नये ब्लॉक के कारण है।
इन विधाओं का फायदा तभी मिलेगा जब आप अपनी जीवनशैली को बदलते हैं। आप अपने घर की नाली से इनकी तुलना कर सकते है। जब उसमे कचड़ा जमा होता है तो हम उसको साफ करवाते है। अगर वो साफ नही की जा सकती है तो हम नई नाली बनवाते है। अगर हम नाली में कचड़ा बारबार डालते है तो हमें अपनी नाली में से कचड़ा बारबार निकलवाना पड़ता है।
अपनी धमनियों में कचड़ा न जमा होने दे। स्वच्छ धमनियों से आप लंबे समय तक मज़े से जीवन जी पाएंगे।
शुभकामनाएं, उम्मीद है कि आपको इन विधाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डॉ अनिल गुप्ता जबलपुर के मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ है और सरल भाषा में चिकित्सा से संबंधित आलेख भी लिखते है