मशहूर शहर मोहनजोदड़ो को दफ़न करने की तैयारी

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इस्लामाबाद =सिंधु घाटी सभ्यता के मशहूर शहर और अविभाजित भारत की विश्व प्रसिद्ध पहचान ‘मोदनजोदड़ो’ जल्द ही मिट्टी में दफन हो सकता है। यह शहर 5,000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता का अंश है। पिछले लंबे समय से इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। इसे बचाने की कोशिश में लगे पुरातत्वशास्त्रियों ने अब फैसला किया है कि मोहनजोदड़ो को बचाने के लिए इसे दफन करना होगा। उनका कहना है कि इस जगह पर खुदाई बंद कर देनी चाहिए और इसे जमीन में दफना देना चाहिए। पुरातत्वशास्त्रियों के मुताबिक, जबतक इसके संरक्षण का कोई और बेहतर तरीका नहीं मिल जाता, तब तक इसे जमीन में दफनाना ही बेहतर होगा। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता डॉक्टर रिचर्ड मिडो ने कहा, ‘फिलहाल इसे दफनाकर ही हम इसकी हिफाजत कर सकते हैं।’पिछले कई सालों से इसके संरक्षण की कोशिश हो रही है, लेकिन कोई भी उपाय संतोषजनक नतीजे नहीं दे पाया…
इंडिपेंडेंट की खबर के मुताबिक मोहनजोदड़ो को पहले-पहले भारतीय पुरातत्व संस्थान के एक अधिकारी राखालदास बनर्जी ने साल 1922 में खोजा था। 1947 में हुए भारत विभाजन के बाद यह जगह पाकिस्तान के सिंध प्रांत हिस्से में चली गई थी। इसके बाद अगले 50 सालों में यहां कई चरण में खुदाई की गई। इन खुदाइयों में यहां ताम्र युग में बसे एक शहर के अवशेष मिले। हड़प्पा सभ्यता के अन्य शहरों की ही तरह मोहनजोदड़ो भी परफेक्ट वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। इन शहरों को जितने सुनियोजित तरीके से बसाया गया था और जिस तरीके से पूरे शहर के डिजाइन की प्लानिंग की गई, उसकी नकल कर पाना आधुनिक शहरों के लिए भी काफी मुश्किल है।
यह शहर हड़प्पा सभ्यता का ही अंश है। मुख्यतौर पर सिंधु नदी और इसके आसपास के इलाकों में फैली यह सभ्यता 2500 ईसापूर्व में अपने चरम पर थी। माना जाता है कि करीब 1900 ईसापूर्व में इसका अंत हो गया। यह सभ्यता क्यों खत्म हुई, इसका कोई ठीक-ठीक कारण अभी तक नहीं बताया जा सका है, लेकिन कई इतिहासकार इसके पीछे अलग-अलग कारण गिनाते हैं।
वैज्ञानिकों को डर है कि सिंधु घाटी के उच्च तापमान और गर्मी के कारण मोहनजोदड़ो पर काफी बुरा असर पड़ सकता है। यहां काम कर रहे जर्मनी के शोधकर्ता डॉक्टर माइकल जेनसन ने न्यूज एजेंसीएएफपी को बताया कि इस पूरे इलाके में गर्मी बहुत ज्यादा है। गर्मियों के मौसम में यहां का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसके अलावा भूमिगत जल में पाए जाने वाले नमक के कारण भी इस जगह के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञों को यह भी डर है कि जिस तरह इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में स्थित प्राचीन रोमन शहर पलमायरा को तबाह कर दिया, वैसे ही कोई आतंकवादी संगठन इस जगह को भी नुकसान पहुंचा सकता है। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों काफी मजबूत हुए हैं। इन संगठनों में तालिबान भी अहम है। तालिबान ने 2001 में अफगानिस्तान की स्वात घाटी में स्थित बामियान की विश्व प्रसिद्ध बुद्ध प्रतिमाएं तोड़ दी थीं।
मोहनजोदड़ो को सबसे बड़ा खतरा उन पर्यटकों से भी है, जो हजारों की संख्या में हर साल यहां पहुंचते हैं। फरवरी 2014 में आयोजित सिंध महोत्सव के दौरान सैकड़ों मजदूर यहां आए थे। उन्होंने इन अवशेषों पर मंच बनाया, तंबू और शामियाने लगाए और रोशनी का बंदोबस्त किया। इन सब तैयारियों के लिए इन अवशेषों को काफी नुकसान भी पहुंचाया गया। इसके मद्देनजर सिंध हाई कोर्ट को एक आदेश जारी कर श्रमिकों को यह निर्देश देना पड़ा कि वे इन अवशेषों का बहुत ध्यान रखें और बेहद संभलकर काम करें।