तो क्या गंगा भी वापस स्वर्ग लौट जाएंगी

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हरिद्वार = तीर्थ नगरी हरिद्वार जहां गंगा अपना पहला कदम धरती पर रखती है। ऐसी मान्यताएं और कथाएं हैं कि यहां गंगा में डुबकी लगाने से पापी भी तर जाते हैं। इसलिए हर दिन सुबह से लेकर शाम तक यहां हजारो भक्त आस्था की डुबकी लगाते हैं। लेकिन अब एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि गंगा का जल इतना दूषित हो चुका है कि हरिद्वार के हरकी पौड़ी घाट भी अब स्नान के योग्य नहीं रह गया है। तो क्या अब यह मान लेना चाहिए कि पुराणों में गंगा के बारे में कही गई बातें सच हो रही है।
श्रीमद्देवीभागवत् की कथा के अनुसार जब कलयुग के 5000 साल पूरे हो जाएंगे तो गंगा पृथ्वी से वापस स्वर्ग को चली जाएगी। कलयुग ने यह समय पूरा कर लिया है जब गंगा को पृथ्वी से वापस स्वर्ग चले जाना है। क्योंकि कलयुग के अबतक 5000 अधिक वर्ष पूरे हो चुके हैं।बीते साल वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गोमुख ग्लेशियर लुप्त हो चुका है। गोमुख ग्लेशियर से ही गंगा की धारा निकलती है तो क्या यह भी गंगा के लुप्त हो जाने का सूचक है। पुराणों की कथा जिसमे गंगा के पृथ्वी से लौटने की बात कही गई है। श्रीमद्देवीभागवत् की कथा के अनुसार एक बार गंगा और सरस्वती नदी के बीच विवाद हो गया। जब देवी लक्ष्मी बचाव करने आई तो देवी लक्ष्मी को शाप दे दिया कि वह नदी बनकर पृथ्वी पर चली जाएं। इससे देवी लक्ष्मी पद्मा नदी बनकर पृथ्वी बनकर आ गईं।गंगा और सरस्वती को भी एक दूसरे के शाप से नदी बनकर पृथ्वी पर आना पड़ा। इस घटना के बाद नारद जी के पूछने पर भगवान विष्णु ने कहा कि कलयुग के 5000 साल पूरे होने पर धरती से धर्म का लोप होता चला जाएगा इसके साथ ही ये तीनों देवियां भी स्वर्ग लौट आएंगी। पद्मा और सरस्वती नदी पहले ही लोप हो चुकी है।इस पुराण में यह भी बताया गया है कि कलयुग के 5000 वर्ष पूरे होने के बाद काशी और वृंदावन को छोड़कर सभी तीर्थ लुप्त हो जाएंगे यानी काशी और वृंदावन ही मुख्य रह जाएंगे।