कौन है वो मां जो 15 अगस्त को जान देना चाहती है

0
42

अहदाबाद =उम्र के नौ दशक पार कर चुकीं अमेरिकी नागरिक कांताबेन शाह को उनके बेटे ने जबर्दस्ती भारत भेज दिया। अब उनकी इच्छा है कि स्वतंत्रता दिवस पर वह अपनी अंतिम सांस लें। मौत के लिए उनकी इस इच्छा के पीछे दरअसल गृह मंत्रालय की भेजी हुई वह सूचना है जिसके मुताबिक भारत में उनका वीजा केवल 15 अगस्त तक के लिए बढ़ाया गया है।
कांताबेन ने गुजारिश की थी कि उनको बाकी बची जिंदगी भारत में गुजारने की इजाजत दी जाए। डिपोर्ट किए जाने का विरोध कर रहीं कांताबेन वापस अमेरिका नहीं जाना चाहतीं और इसलिए वह आजीवन भारतीय वीजा का इंतजार कर रही हैं। उनकी गुजारिश के बाद गृह मंत्रालय ने उनका वीजा 15 अगस्त तक के बढ़ा दिया। हालांकि, कांताबेन को शार्ट-ड्यूरेशन वीजा स्वीकार नहीं है। वह कहती हैं कि मैं उम्मीद करती हूं कि इस दिन मैं अपनी आखिरी सांस लूं। मुझे 15 अगस्त तक का एक्सटेंशन दिया गया है। इसी दिन हमें ब्रिटिशर्स से आजादी मिली थी। ठीक इसी तरह मुझे लगता है कि ऊपरवाला इस दिन मुझे इस दुनिया से आजाद कर देगा।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक इस बीच, गृह मंत्रालय ने शाह को जानकारी दी है कि उनका मामला विदेश मंत्रालय को भेज दिया गया है और अब मंत्रालय के फैसले का इंतजार है। फिलहाल शाह अपने बड़े बेटे जयेश शाह के साथ अहमदाबाद के पाल्दी में रह रही हैं। शाह बताते हैं कि स्थानीय अधिकारियों ने उनकी मां को सवाल पूछकर परेशान करना बंद कर दिया है लेकिन अभी वीजा एक्सटेंशन की सूचना उनको नहीं मिली है।
90 वर्षीय कांताबेन पिछले साल 15 नवंबर को अहमदाबाद पहुंची थीं। तब उनके पास अमान्य भारतीय वीजा था। उनके छोटे बेटे ने जबर्दस्ती उनको भारत भेज दिया था। उनका बेटा अमेरिका में एक मोटल चलाता है। उनके पास भारत का 5 साल का विजिटिंग वीजा था लेकिन यह पिछले साल 15 अगस्त को ही एक्सपायर हो गया था। जब वह भारत पहुंचीं तो उन्हें नियमों के मुताबिक अमेरिका वापस लौटने के का इंतजाम करने के लिए 72 घंटों का वीजा दिया गया।
इमिग्रेशन अथॉरिटीज ने भारत में रहने देने का उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया। 12 जनवरी को फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ने अमेरिका का हवाई टिकट अरेंज करके उन्हें जल्द से जल्द अपने सामने पेश होने की अल्टीमेटम दिया। शाह ने प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी अधिकारीयों से निवेदन किया की कि उनको भारत छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए और उन्हें अंतिम सांस तक यहां रहने की इजाजत दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अमेरिका वापस जाकर अपने छोटे बेटे के साथ रहने की हालत में नहीं हैं।