दिव्य दृष्टि का कमाल… रिज़ल्ट के साथ ही हुआ स्टूडेंट्स का सम्मान…….

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जहीर अंसारी
मध्य प्रदेश के लिए कितने गौरव की बात है कि देश को लाखों वर्ष बाद ‘संजय दृष्टि’ का व्यक्तित्व मिल गया। अब तक देश-विदेश के लोग द्वापर युग के राजा धृतराष्ट्र के सहायक ‘संजय’ की दिव्य दृष्टि के बारे में सुना करते थे। हस्तिनापुर के राजमहल में बैठे-बैठे ‘संजय’ अपनी दिव्य दृष्टि के माध्यम से कौरव-पांडवों के मध्य चल रहे युद्ध का सीधा प्रसारण कर दिया करते थे। राजा धृतराष्ट्र को आँखों देखा हाल बता दिया करते थे, ठीक वैसे ही जैसे आजकल घर बैठे संसद की कार्यवाही से लेकर आईपीएल मैच का लाईव टेलिकास्ट देखा जाता है।
धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि द्वापर युग 8 लाख वर्ष से ज़्यादा का रहा। इतने वर्षों बाद प्रदेश में ‘संजय’ दृष्टि का ‘मानव’ प्रकाश में आया है। इस ‘मानव’ को भविष्य में घटने वाली तमाम घटनाओं का ज्ञान हो जाता है।
प्रमाण स्वरूप एक मिसाल दी जा सकती है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित दसवीं और बारहवीं के रिज़ल्ट 12 मई को सुबह 10 बजे घोषित किए गए। वार्षिक परीक्षा परिणाम पूर्णता गोपनीय रखा जाता है। परिणाम आने से पहले किसी को भी कानों कान भनक नहीं होती। बावजूद इसके ‘मानव’ को दो दिन पूर्व ही ‘दिव्य दृष्टि’ के माध्यम से यह ज्ञात हो गया था कि कितने छात्र-छात्रायें मेरिट में आ रहे हैं। लिहाज़ा उन्होंने ने मेरिट लिस्ट में आने वाले बच्चों को दो दिन पहले ही संदेश करवा दिया था कि वे मेरिट में आने वाले हैं और उनका सम्मान भी किया जाएगा। हुआ भी यही प्रदेश के अलग कोने से भोपाल अपने पेरेंट्स के साथ पहुँचे छात्र-छात्राओं का आत्मीय स्वागत व सम्मान रिज़ल्ट घोषित होने के तत्काल बाद किया गया।
कुछ नेतागणों को इस दिव्य दृष्टि पर भरोसा नहीं हो रहा है। चीख़-चिल्लाहट मचाए पड़े हैं।गोपनीयता और विश्वसनीयता का प्रश्न उठा रहे हैं। विरोध करने वाले नेता जी बोले कि यदि इस तरह की कोई दृष्टि होती तो हम भी अपना भविष्य जनवा लेते। पिछले तीन बार से हमारी पार्टी चुनाव हार रही है। रुपया-पैसा भी जा रहा है और हार पे हार मिल रही है। हमारे शीर्ष नेता की ‘इन्सल्ट’ हो रही है, सो अलग। अब चौथी बार का क्या होगा। उनके इस सवाल पर बाज़ू में बैठे श्रीमान ने सलाह दी कि उस ‘मानव’ की दिव्य दृष्टि से दिखवा लें कि अगली बार आ की पार्टी का क्या होगा, वैसे उन्हें तो अपना पता है 200 प्लस।
यह सुनकर नेता जी भड़क गए। बोले अगर ऐसी ही दिव्य दृष्टि है तो उन बच्चों को मरने से रोकने की व्यवस्था भी कर लेते जो रिज़ल्ट आने पर आत्महत्या कर बैठते हैं।

ज़हीर अंसारी की फेसबुक वाल से साभार