नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष ने पलटी रणनीती

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नई दिल्ली =नोटबंदी के मुद्दे पर भारत बंद के आह्वान को सोमवार को विपक्षी दलों ने जन आक्रोश दिवस के रूप में ‘पलट’ दिया। विपक्षी दलों ने बदली हुई रणनीति के तहत जन अाक्रोश दिवस के रूप में प्रदर्शन किया। दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया, जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में मार्च निकाला गया। ‘भारत बंद’ के आह्वान पर कांग्रेस, तृणमूल ने एक सुर में कहा है कि दिल्ली में हुई 18 विपक्षी पार्टियों की बैठक में ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ था। उनके मुताबिक इसे जन आक्रोश दिवस के रूप में मनाने की बात कही गई थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को सफाई देते हुए कहा, ‘हमने भारत बंद नहीं बुलाया है, क्योंकि इससे आम लोगों को तकलीफ होगी। हमने जन आक्रोश दिवस बुलाया है। 18 विपक्षी दलों की बैठक में हमने जन आक्रोश दिवस मनाने का फैसला किया था न कि भारत बंद का। भारत बंद के लिए तो पीएम नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं।’
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भारत बंद का समर्थन नहीं करने का ऐलान किया है। ममता ने भी सफाई में विपक्षी पार्टियों की बैठक का हवाला देते हुए कहा, ‘ इस बैठक में भारत बंद का फैसला नहीं हुआ था। हम भारत बंद का समर्थन नहीं करते हैं।’ ममता ने सोमवार को मार्च निकालकर नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
नोटबंदी के खिलाफ भारत बंद पर बीएसपी प्रमुख मायावती भी पलटती नजर आईं। पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए बीएसपी प्रमुख मायावती ने इसे लोगों के लिए तकलीफ वाला फैसला बताया। मायावती ने कहा, ‘ बीजेपी कह रही है कि विपक्षी पार्टियों ने भारत बंद बुलाया है। पर, हकीकत यह है कि पीएम की नोटबंदी की घोषणा के बाद से ही भारत बंद है।’ उन्होंने कहा, ‘ हम भारत बंद में शामिल नहीं हैं। विरोध का हमारा अपना तरीका है। पीएम केवल बाहर लंबी-चौड़ी बातें कर रहे हैं। पीएम की सदन में आकर जवाब देने की हिम्मत नहीं है। सरकार नोटबंदी पर तानाशाही रवैया छोड़े।’

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