घर में शंख रखने और बजाने के लाभ,

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पंडित दयानंद शास्त्री

हमारी भारतीय सनातन संस्कृती और बौद्ध धर्म में शंख का महत्व काफ़ी ज़्यादा है| पूजा पाठ में तो इसे इस्तेमाल किया ही जाता है, साथ ही इसकी पूजा भी की जाती है. हर अच्छी शुरुआत से पहले इसे बजाना शुभ माना जाता है. साथ ही ये भी मान्यता है कि महाभारत की शुरूआत भी श्री कृष्ण के शंखनाद से ही हुई थी |गरूड़ पुराण में ये भी लिखा है कि किसी भी मंदिर के पट खोलने से पहले शंखनाद करना आवश्यक होता है और इसके बाद ही पूजा की शुरुआत हो सकती है | शंखो को हमेशा से वाद्य यंत्र के स्वरुप में पेश किया गया है। माना जाता है कि इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल युद्ध को शुरू या समाप्त करने के लिए होता था।

समुद्र मंथन के समय मिले 14 रत्नों में छठवां रत्न शंख था। शंखनाद से निकली ध्वनि में अ-उ-म् (ओम्) अथवा ‘ओम्’ शब्द उद्धोषित होता है जहां तक ‘ओम्’ का नाद पहुंचता है वहां तक नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका सहोदर भाई है। अत यह भी मान्यता है कि जहाँ शंख है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। स्वर्गलोक में अष्टसिद्धियों एवं नवनिधियों में शंख का महत्वपूर्ण स्थान है। शंख को समुद्रज, कंबु, सुनाद, पावनध्वनि, कंबु, कंबोज, अब्ज, त्रिरेख, जलज, अर्णोभव, महानाद, मुखर, दीर्घनाद, बहुनाद, हरिप्रिय, सुरचर, जलोद्भव, विष्णुप्रिय, धवल, स्त्रीविभूषण, पाञ्चजन्य, अर्णवभव आदि नामों से भी जाना जाता है |

अथर्ववेद के अनुसार, शंख से राक्षसों का नाश होता है- शंखेन हत्वा रक्षांसि। भागवत पुराण में भी शंख का उल्लेख हुआ है। यजुर्वेद के अनुसार युद्ध में शत्रुओं का हृदय दहलाने के लिए शंख फूंकने वाला व्यक्ति अपेक्षित है। अद्भुत शौर्य और शक्ति का संबल शंखनाद से होने के कारण ही योद्धाओं द्वारा इसका प्रयोग किया जाता था। शंख को नादब्रह्म और दिव्य मंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख की ध्वनि को ‘ॐ’ की ध्वनि के समकक्ष माना गया है। शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार शंख की उत्पत्ति सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु अग्रि से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्वों से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी गई है।
मंदिर के शंख में जल भरकर ही भगवान की आरती की जाती है | आरती के बाद शंख का ही जल भक्तों पर छिड़का जाता है जिससे वे प्रसन्न होते है| जो व्यक्ति भगवान श्री कृष्ण को शंख में फूल, जल और तिलक रखकर उन्हें अर्ध्य देता है उसको अपार पुण्य की प्राप्ति होती है| ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि शंख में जल रखने और इसे छ‍िड़कने से वातावरण शुद्ध होता है| शंख में गाय का दूध रखकर इसका छिड़काव घर में किया जाए तो इससे भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शंख की आवाज लोगों को पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित करती है. ऐसी मान्यता है कि शंख की पूजा से कामनाएं पूरी होती हैं| इससे दुष्ट आत्माएं पास नहीं फटकती हैं| वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है |कई टेस्ट से इस तरह के नतीजे मिले हैं | शंख से वास्तुदोष भी मिटाया जा सकता है। शंख को किसी भी दिन लाकर पूजा स्थान पर पवित्र करके रख लें और प्रतिदिन शुभ मुहूर्त में इसकी धूप-दीप से पूजा की जाए तो घर में वास्तुदोष का प्रभाव कम हो जाता है।

पूजा-पाठ में भी शंख बजाने का नियम है। यदि इसके धार्मिक पहलू को दरकिनार भी कर दें तो भी घर में शंख रखने और इसे नियमित तौर पर बजाने के ऐसे कई फायदे हैं, जो सीधे तौर पर हमारी सेहत से जुड़े हैं। लेकिन शायद ही ऐसे लोग होंगे जो इससे होने वाले लाभो के बारे में जानते होंगे। यह बजाने के साथ ही सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। विश्व का सबसे बड़ा शंख केरल राज्य के गुरुवयूर के श्रीकृष्ण मंदिर में सुशोभित है, जिसकी लंबाई लगभग आधा मीटर है तथा वजन दो किलोग्राम है।

विज्ञान भी शंखनाद की उपयोगिता को मानता है. इसके उपयोग से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं और दिल की किसी भी तरह की बीमारी का डर खत्म होता है. अगर आपको रक्तचाप की समस्या है तो उसका भी रामबाण इलाज है शंखनाद |

शंखनाद के भी दो प्रकार होते हैं—पहला प्रकार होता है पूजा से पहले शंखनाद करना. इससे ही पूजा की शुरुआत होती है. इसे हमेशा पूजा स्थान के दाईं तरफ़ से बजाना चाहिए. साथ ही दूसरा शंखनाद पूजा के खत्म होने पर होता है, जो बाईं तरफ़ से बजाया जाता है |

शंखनाद तो काफ़ी लोग करते हैं, लेकिन इसका सही तरीका बहुत कम लोगों को ही पता होता है|| शंखनाद करते वक़्त हमेशा इसे बजाने वाले का सिर ऊपर की तरफ़ होना चाहिए. शंखनाद करने से पहले पानी बिलकुल नहीं पीना चाहिए. इससे आपके मुंह की गंदगी शंक में चली जाएगी और शंख अशुद्ध माना जाएगा. इसे बजाने वाले का शरीर स्थिर होना चाहिए. इसे बजाने के लिए गले पर नहीं बल्कि नाभी पर ज़ोर देना होता है. तभी इसकी ध्वनि में कंपन आता है जिससे इसकी नाद से फ़ायदा मिलता है | रात को शंख में थोडा पानी भरकर रख दे और दुसरे दिन सुबह वो पानी पीने से ,बोली में हकलाने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

शंख बजाने से गला खुलता है और आवाज अच्छी होती है। जो लोग तुतलाके बोलते है उन्हें शंख बजाना चाहिए। शंख बजाने से आत्मविश्वास बढता है। ऋषि श्रृंग के अनुसार बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे शंख बांधने व शंख जल पिलाने से वाणी-दोष दूर हाते हैं। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मूक व श्वास रोगी हमेशा शंख बजाए तो बोलने की शक्ति पा सकते हैं।वास्तुशास्त्र के मुताबिक भी शंख में ऐसे कई गुण होते हैं, जिससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है. शंख की आवाज से ‘सोई हुई भूमि’ जाग्रत होकर शुभ फल देती है |तानसेनने अपने आरंभिक दौर में शंख बजाकर ही गायन शक्ति प्राप्त की थी।
ध्यान रहे कि आप यदि अपने घर में इनमें से किसी भी प्रकार का शंख रखना चाहते हैं ‍तो किसी जानकार से पूछकर ही रखे। कितने शंख रखना है और कौन कौन से यह वही बता सकता है।

ये हैं शंख में रखे पानी के फायदे—-

-शंख में रातभर रखे पानी को तीन चम्म्च सुबह खाली पेट पीने से कब्ज जैसी तकलीफों में फायदा होता है।

-रातभर शंख में रखे पानी में उतना ही सादा पानी मिलाकर आँखों को धोने से आँखें हेल्दी रहती है।

-नहाने के बाद शंख को स्किन पर हल्के-हल्के रगड़ने से स्किन ग्लो करती है।शंख में रातभर रखे पानी से सुबह स्किन की रेगुलर मसाज करे। स्किन संबधित बिमारियों में फायदा होता है।
——-शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है। साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता।
——यदि शंखों में भी विशेष शंख जिसे दक्षिणावर्ती शंख कहते हैं इस शंख में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें। फिर इस दूध को निरूसंतान महिला को पिलाएं। इससे उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है।

-शंख में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अलावा कई मिनरल्स होते हैं जो हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं।

-शंख बजाने के अलावा इसमें रखा पानी कई बीमारियों में फायदा करता है। शंख में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। गले की मसल्स की एक्सरसाइज होती है। वोकल कार्ड और थाइरायड से जुडी प्रॉब्लम्स में फायदा होता है।

-ब्रेन और पूरी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। हेयर फॉल की प्रॉब्लम भी दूर होती है।

– फेस की मसल्स की एक्सरसाइज होती है। झुर्रियों से बचाव होता है।

—शंखनाद करते समय इनका रखें ध्यान :—

1. जिस शंख को बजाया जाता है उसे पूजा के स्थान पर कभी नहीं रखा जाता

2. जिस शंख को बजाया जाता है उससे कभी भी भगवान को जल अर्पण नहीं करना चाहिए

3. एक मंदिर में या फ़िर पूजा स्थान पर कभी भी दो शंख नहीं रखने चाहिए

4. पूजा के दौरान शिवलिंग को शंख से कभी नहीं छूना चाहिए

5. भगवान शिव और सूर्य देवता को शंख से जल अर्पण कभी भी नहीं करना चाहिए
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पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री,(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्
मोब. 09669290067 (मध्य प्रदेश)
वॉटसअप नंबर —09039390067….