मध्य प्रदेशः अब अफसरों को ‘बेचनी’ पड़ रही है प्याज

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भोपाल- onion देश में सरकारें बनाने और गिराने की भूमिका निभा चुका प्याज इन दिनों मध्य प्रदेश के अफसरों को नाकों चने चबवा रहा है। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने, जो प्याज खरीदवाई थी वह अब अफसरों के गले का फंदा बन गई है। सरकार ने अफसरों से कहा है कि वे गोदामों में पड़ी प्याज बेचें। प्याज बेचने के लिए अफसर नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं। एक जिला कलेक्टर ने तो सभी सरकारी कर्मचारियों को 50-50 किलो प्याज खरीदने का निर्देश दिया है।

नवभारतटाइम्स की खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ने 6 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज की खरीद करवाई थी। पूरे प्रदेश में कई हजार टन प्याज खरीदी गई थी। सरकार ने प्याज खरीद तो ली, लेकिन अब उसे यह समझ में नही आ रहा कि वह गोदामों में पड़ी प्याज का क्या करें। प्याज गोदामों में सड़ रही है। अब सरकार चाहती है कि औने-पौने दाम पर प्याज बेच दी जाए। उसने प्याज बेचने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपी है और 6 रुपये में खरीदी प्याज 4 रुपये में बचने को कहा है।

सड़ रही प्याज बेचने की जिम्मदारी से परेशान कलेक्टरों को समझ में नही आ रहा कि वो क्या करें। खरगौन जिले के कलेक्टर अशोक वर्मा ने तो सभी सरकारी कर्मचारियों को लिखित आदेश दिया है कि वे कम से कम 50 किलो प्याज खरीदें। वर्मा सरकारी संस्थाओं में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों पर भी प्याज खरीदने का दबाव डाल रहे हैं। कलेक्टर के इस आदेश से जिले के कर्मचारी और अधिकारी परेशान हैं। उन्होंने जबरिया प्याज खरीदने के आदेश का विरोध किया है।
उधर लिखित आदेश जारी करने वाले कलेक्टर का कहना है कि 4 रुपये किलो के हिसाब से 50 किलो प्याज सिर्फ 200 रुपये की होती है। इतना प्याज तो हर कर्मचारी खरीद सकता है। कलेक्टर का यह भी कहना है कि उन्होंने लिखित सलाह दी है। प्याज खरीदना कर्मचारियों की बाध्यता नही हैं। इस बीच गोदामों में सड़ रही प्याज ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल सभी कलेक्टरों से कहा है कि अपने-अपने इलाके के हिसाब से प्याज का भाव तय करें। उन्होंने टेंडर करके प्याज बेचने की भी सलाह दी है। फिलहाल प्याज सरकार से लेकर सरकारी कर्मचारियों के गले की फांस बना हुआ है।