राज्यसभा में दूसरे दिन भी जारी रहा बवाल,

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नई दिल्ली -राज्यसभा में बजट सत्र का दूसरा भाग भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। दूसरे दिन उत्तराखंड मामला और जेएनयू के छात्रों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला गूंजा। उत्तराखंड मसले पर कांग्रेस सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। वहीं लेफ्ट के सदस्यों ने जेएनयू मुद्दे पर मानव संसाधन मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए। हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस सदस्य राज्यसभा में चर्चा की मांग कर रहे थे। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा है। जेटली ने कहा, ‘उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए राष्ट्रपति शासन का फैसला बिल्कुल ठीक था। रावत सरकार अल्पमत में थी। अल्पमत की सरकार बहुमत पर हावी होने की कोशिश कर रही है। मामला फिलहाल कोर्ट में है, इसलिए इस पर चर्चा का औचित्य नहीं है।’
वहीं लेफ्ट के डी राजा ने जेएनयू का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा छात्रों के ऊपर इस कदर की दमनात्मक कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या है। राजा ने कहा, ‘मानव संसाधन मंत्रालय के इशारों पर यह कार्रवाई की गई। सरकार छात्रों की आवाज दबाना चाहती है।’ विपक्षी दल के सदस्य इसके बाद एक-एक कर नारेबाजी करने लगे।
गौरतलब है कि जेएनयू कैंपस में नौ फरवरी को हुए कार्यक्रम के लिए छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया। वहीं उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया। पूर्व अध्यक्ष आशुतोष पर भी 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
नारेबाजी करते हुए सदस्य वेल में पहुंच गए। सदन में ‘मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘मोदी तेरी हिटलरशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगे। वहीं मायावती ने भी कहा कि धारा 356 का हमेशा ही दुरुपयोग होता रहा है। केंद्र में कांग्रेस ऐंड पार्टी की सरकार हो या अबबीजेपी

New Delhi: Opposition members protest in the Rajya Sabha in New Delhi on Tuesday. PTI Photo / TV GRAB (PTI12_22_2015_000269A)
ऐंड पार्टी की सरकार है, राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रावधान को अपने हित के लिए इस्तेमाल करने की परंपरा रही है। मायावती ने भी कहा कि उत्तराखंड मामले पर चर्चा होनी चाहिए।