भोलेनाथ को पर्यावरणविद बताने पर विवाद

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मैसुरु -पिछले साल की तरह ही इस बार भी इंडियन सायेंस कांग्रेस विज्ञान और मिथकीय दावों के बीच में फंस गई है। सायेंस कांग्रेस में अब भगवान शिव को पर्यावरणविद् करार देने पर विवाद छिड़ गया है। इंडियन सायेंस कांग्रेस में पढ़े जाने के लिए मध्य प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटी रेग्युलेटरी कमिशन के चेयरमैन अखिलेश कुमार पाण्डेय ने अपना शोध पत्र सौंपा था। उन्हें बुधवार को अपना रिसर्च पेपर पढ़ना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते वह नहीं आ सके।
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक उनके 380 पेज के रिसर्च पेपर के कुछ हिस्से सामने आने के बाद सायेंस कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने सवाल खड़े किए हैं। इंडियन सायेंस कांग्रेस असोसिएशन की ओर से सामने लाए गए रिसर्च पेपर में भगवान शिव को पर्यावरणविद् करार दिया गया है। बोटैनी के प्रफेसर पाण्डेय ने बताया कि उनका लक्ष्य प्राचीन भारत में पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी देना था।
पत्रकारों की ओर से सवाल खड़े करने के बाद इन्वाइरनमेंटल सायेंस विभाग के अध्यक्ष गंगाधन मिश्रा ने कहा कि किसी लेख को विभाग की ओर से पेश किए जाने वाले रिसर्च पेपर्स में शामिल करना उनका विशेषाधिकार है। हालांकि इन्वाइरनमेंट सायेंस के फैकल्टी मेंबर्स ने उनके इस कदम का विरोध किया था। सदस्यों का कहना है कि किसी पेपर को शामिल करने से पहले पर्याप्त स्क्रीनिंग की जानी चाहिए।
हालांकि गंगाधर मिश्रा ने कहा कि वह इस लेख को शामिल करने में कुछ भी गलत नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में भारत में किस तरह से लोग पर्यावरण के संरक्षण को महत्व देते थे, इस ओर ध्यान दिलाने के लिए ही शोध पत्र को शामिल किया गया था।