नीतीश कटारा हत्याकांड: दोषियों को फांसी नहीं होगी

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नई दिल्ली -सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा के हत्यारों के लिए मौत की सजा की मांग करने वाली दिल्ली सरकार की अपील खारिज कर दी गई है। साल 2002 में हुए नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास और विशाल यादव को 30 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
जस्टिस जे एस खेहर और आर भानुमति की बेंच ने कहा, ‘इन्होंने जो किया था वह माफ नहीं किया जा सकता है लेकिन इन्होंने जो किया वह इतना जघन्य नहीं था जिसके लिए उन्हें मौत की सजा सुनाई जाए।’
इसी बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विकास, विशाल और सुखदेव पहलवान की विशेष छुट्टी की याचिका को खारिज कर दिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश सालवे द्वारा दायर की गई याचिका को नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा की मौजूदगी में मौत की सजा की मांग को खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वे इसे ऑनर किलिंग नहीं मानते हैं। सालवे ने सुनवाई शुरू करते ही कहा था कि हाई कोर्ट ने इसे ऑनर किलिंग माना था।
इससे पहले अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी विशाल और विकास यादव की सजा को मौत की सजा में तब्दील करने से इनकार कर दिया था। नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा ने विकास और विशाल के लिए मौत की सजा की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
नीतीश कटारा की फरवरी 2002 में हत्या कर दी गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए विशाल और विकास यादव को 30-30 वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी। विकास और विशाल यादव अपनी बहन भारती के साथ नीतीश के कथित रिश्तों का विरोध कर रहे थे।
विकास यादव उत्तर प्रदेश के राजनेता डीपी यादव का बेटा है और विशाल उसका चचेरा भाई है।