मासिक वेतन ढाई लाखः पर पहनता है केवल बनियान

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अहमदाबाद -कॉर्पोरेट की दुनिया में कहावत है कि कपड़ों से इंसान की शख्सियत बनती है। ऐसे में 59 साल के ए.डी.नाइक एक अपवाद हैं। ओएनजीसी में काम करने वाले नाइक प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं। उनकी मासिक तनख्वाह 2.5 लाख रुपये है। उन्होंने कलफ लगे हुए अपने फॉर्मल कपड़ों को छोड़कर एक सफेद बनियान पहनने का फैसला किया है।नाइक का संकल्प है कि वह तब तक इन्हीं कपड़ों को पहनते रहेंगे जब तक कि समाज अपने फायदों के बारे में सोचने वाले भ्रष्ट्र लोगों से मुक्त नहीं हो जाता है।
चाहे वह बिजनस क्लास में सफर कर रहे हों या फिर हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट सम्मेलनों और सामाजिक समारोहों में शामिल हो रहे हों, पर नाइक साल 2005 से ही बनियान पहनते आ रहे हैं। कमर के ऊपर केवल बनियान और एक पतलून में दिखने वाले नाइक बॉम्बे हाई के पास ओएनजीसी की ‘नीलम पन्ना’ योजना में सुपरिटेंडेंट इंजिनियर हैं।
नाइक ने कपड़ों को लेकर यह फैसला 16 नवंबर 2005 को लिया था। अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा चांदखेड़ा गांव की 3.2 एकड़ जमीन का 40 फीसद हिस्सा शहरी विकास योजना के अंतर्गत घटा दिए जाने के विरोध में उन्होंने यह फैसला किया।
अपने फैसले की शुरुआत को याद करते हुए नाइक ने बताया, ‘एयूडीए के कुछ अधिकारियों ने सार्वजनिक सड़क के लिए आवंटित जमीन से 40 फीसद हिस्सा घटा दिया। मैंने इस फैसले को बदलने के लिए काफी अनुरोध किया। दरअसल यह मामला राज्य अधिकारियों के सामने सुनवाई के लिए लंबित था। इसी आधार पर मैंने एयूडीए से अपना फैसला वापस लेने की विनती की, लेकिन उनपर कोई असर नहीं पड़ा। उनके तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर मैंने उनके सामने ही अपनी कमीज फाड़ दी। उस दिन के बाद से ही मैंने फिर कभी कमीज नहीं पहनी।’
साल 2013 से नाइक ने एक गांधी टोपी लगाना भी शुरू कर दिया। उसपर मैकेनिकल इंजिनयरिंग की उनकी डिग्री का जिक्र होने के साथ-साथ भ्रष्टाचार हटाओ का संदेश भी लिखा है।
नाइक ने बताया, ‘मेरी वेशभूषा से लोगों की दिलचस्पी मेरी ओर खिंचती है। मैं उन्हें अपने संकल्प और समाज में बढ़ रहे भ्रष्टाचार के बारे में बताता हूं। मैं एक मध्यम वर्गीय साधारण इंसान हूं। इस भ्रष्ट व्यवस्था के प्रति विरोध जताने के लिए मेरे पास यही तरीका है।’