गरीब बच्चा और कुसुम महदेले की लात

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चैतन्य भट्ट
[is_logged_in]मध्य प्रदेश की पशुपालन मंत्री कुसुम महदेले ने एक भिखारी के बच्चे को लात क्या मार दी सारा देश का मीडिआ उनके पीछे हाथ धो कर पड़ गया सारे देश के चैनल दिन भर उसी वीडिओ को दिखाते रहे जिसमे कुसुम महदेले उस गरीब बच्चे को लात मार रही है और बाद में उनके अंगरक्षक उस बच्चे को उठा कर किनारे फेंक रहे है इस देश का मीडिआ भी बड़ा ही अजीब है एक खबर पकड़ लेते है और दिन भर उससे खेलते रहते है अरेये तो सोचना चाहिए की वो मंत्री है पहले के ज़माने में राजा महाजा हुआ करते थे उनके मंत्री गण होते थे इन मंत्रियो का जलवा किसी राजा से काम नहींआता था अब भले ही जमाना बदल गया हो मंत्री पद तो जिन्दा है आर जब इंसान मंत्री बन जाता है तो उसके पैर जमीन पर नहीं आते वो आसमान में उड़ने लगता है जनता उसे कीड़े मकोड़ो की तरह लगाने लगती है और क्यों न लगे चारो तरफ जय जय कार करती जनता और चमचो की फ़ौज वर्दीधारी सिपाही और की फ़ौज रक्षा के लिए तैनात कलेक्टर एसपी अगल बगल जब इतना जलवा आदमी की आँखों के सामने हो तो किसे अहंकार नहीं होगा और फिर वे तो सत्तर साल की हो गयी है कहा जाता है की इंसान का दिमाग साठ साल की उम्र के बाद काम करना बंद कर देता है इसलिए सरकार सरकारी कर्मचारियों को रिटायर कर देती है इस हिसाब से तो महदेले मेडम को दस साल पहके ही रिटायर हो जाना चाहिए पर राजनीती में उम्र थोड़े न देखी जाती है इंसान जब तक जिन्दा रहे तब तक वो मंत्री बना रह सकता है मुख्य मंत्री बना रह सकता है दरअसल राजनीती में दिमाग की जरूरत ही कँहा पड़ती है बस जोड़ तोड़ करते रहो अपने नेताओ के पैर पूजते रहो आपको धेले भर का ज्ञान न हो पर आप मंत्री बन जाओगे यही हल अपनी महदेले मेडम का है सुना है की शिवराज सिंह बड़े नाराज है अपने मंत्री से और उनकी इस हरकत से पर अपने को मालूम है की वे मेडम का कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्योकि जब वे अपने अफसरों को काबू में नंही कर पा रहे है तो मंत्री तो बड़ी चीज है और फिर उन्हें भी तो अपनी राजनीती चलाना है अब रहा सवाल उस गरीब बच्चे का तो इसका ही भारी दोष हैअरे भीख मांगना ही था तो किसी आम आदमी से मांग लेते उन नेताओ से क्या भीख मांगना जो खुद घर घर जाकर वोटो की भीख मांगते हहै जो खुद ही मांगता हो वो भला किसी को क्या देगा ये तो समझना था उस बच्चे को