मोदी की रैली के लिए काटे गए सैकड़ों पेड़

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पटना -बिहार के मधेपुरा जिले में एक नवंबर को प्रस्तावित पीएम मोदी की चुनावी रैली के लिए यहां सैकड़ों की तादाद में पेड़ों को काटा और उखाड़ दिया गया। यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी। नाम न जाहिर करने की शर्त पर जिले के एक अधिकारी ने बताया, ‘ मोदी की चुनावी रैली के लिए जगह बनाने के लिए बीपी मंडल यूनिवर्सिटी परिसर में सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया और कुछ को उखाड़ दिया गया। इनमें फल देने वाले पेड़ भी शामिल हैं।’
पेड़ों के काटे जाने की इस खबर का सबसे पहले मधेपुरा के एक न्यूज पोर्टल मधेपुराटाइम्स में जिक्र किया गया था। इसके संपादक रुद्र नरेन यादव ने कहा कि तकरीबन 400 से 500 पेड़ों को काट दिया गया और पिछले दो वर्षों में रोपे गए अलग-अलग प्रजातियों के एक हजार से ज्यादा पौधों को जड़ से उखाड़ दिया गया। इनमें फल देने वाले पेड़ भी शामिल हैं। मधेपुरा के जिलाधिकारी मोहम्मद सोहेल ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
मधेपुरा और सहरसा जिले में शामिल बाढ़ प्रभावित कोसी क्षेत्र में काम करने वाले एक ग्रीन ऐक्टिविस्ट रंजीव ने कहा कि यह एक चुनावी रैली के नाम पर सैकड़ों पेड़ों को काट देना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। रंजीव ने कहा, ‘मोदी की रैली के नाम पर हरे पेड़ों को कुर्बान कर दिया गया। इससे साफ पता चलता है कि वे पर्यावरण के मुद्दों पर कितने गंभीर हैं।’ स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे असहाय हैं। एक युवा संजीव कुमार बताते हैं, ‘हम सिर्फ विरोध और अपने गुस्से का इजहार ही कर सकते हैं।’
यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी बीएन विवेका ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने रैली करने की अनुमति दी थी, पेड़ काटने की नहीं। बीजेपी के जिला अध्यक्ष अनिल यादव ने जिला प्रशासन को सौंपे अपने पत्र में कहा है कि रैली से पहले और रैली के बाद होने वाले नुकसान की पार्टी फंड से भरपाई की जाएगी। यादव ने यह भी कहा कि रैली के बाद नए पौधे रोप दिए जाएंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर के पहले सप्ताह में कर्नाटक के रेनबेन्नूर इलाके में राहुल गांधी की रैली के लिए चार एकड़ में फैली मक्के की फसल को बर्बाद कर दिया गया था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली एक खेत में होनी थी, जहां फसल उगी हुई थी। इस फसल को 15 दिन बाद काटा जाना था, लेकिन राहुल की रैली के लिए फुटबॉल के तीन मैदानों जितनी बराबर फसल को काट दिया गया था। हालांकि, बाद में कांग्रेस ने दावा किया कि किसान की सहमति के बाद ही फसल काटी गई थी।गौरतलब है कि बिहार ग्रीन कवर बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। सीएम नीतीश कुमार के मुताबिक बिहार में 2011 में ग्रीन कवर 9.79 फीसदी था जो 2015 में बढ़कर 12.86 फीसदी हो गया। नीतीश कुमार ने 2017 तक इसे 15 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। वन अधिकारी बताते हैं कि बिहार का ग्रीन कवर तब बहुत ही कम हो गया था, जब 2000 में झारखंड इससे अलग हो गया था। अविभाजित बिहार में फॉरेस्ट कवर 17 फीसदी था।