बॉम्बे वेलवेट कीअसफलता से अनुराग कश्यप सदमें में देश छोड़ देंगे

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मुंबई -बॉम्बे वेलवेट को किसी ने आधा स्टार दिया, तो किसी ने साढ़े चार स्टार। किसी ने इसे कल्ट बताया, तो किसी ने डिजास्टर। बहरहाल, इस सबके बीच एक्सपेरिमेंटल वर्सेज कमर्शल सिनेमा के भविष्य को लेकर बहस एक बार फिर जोरों पर है…
अनुराग कश्यप की करीब 110 करोड़ के बजट से बनी फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ एक हफ्ते में करीब 22 करोड़ कलेक्ट करने में हांफ गई। देशभर में 2600 स्क्रीन पर रिलीज हुई और रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा व करण जौहर जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म की यह हालत देखकर खुद बॉलिवुड के दिग्गज भी हैरान हैं।
नवभारत टाइम्स में उनके संवाददाता प्रशांत जैन की खबर के मुताबिक बेशक, इस फिल्म के फ्लॉप होने से अनुराग के साथ-साथ रणबीर कपूर को भी बड़ा नुकसान हुआ है। ऐसे में, अनुराग मुंबई छोड़कर पैरिस में बसने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने फेसबुक पर एक बयान जारी करके किसी भी तरह का अफसोस नहीं होने और अपनी वापसी की बात कही है।
वहीं, रणबीर इतनी बड़ी फ्लॉप से गहरे सदमे में हैं। उन्होंने कहा, ‘समझ नहीं आ रहा कि मेरा करियर आगे कहां जाएगा। मुझे नहीं पता कि मेरे करियर का अब क्या होगा।’ खबर यह भी है कि रणबीर का मानना है कि उन्होंने अपने करियर के तीन साल कश्यप भाइयों को देकर अपना नुकसान कर लिया है। कश्यप भाइयों से रणबीर का मतलब अनुराग कश्यप (बॉम्बे वेलवेट) और उनके भाई अभिनव कश्यप से था जिनकी बेशरम सुपर फ्लॉप रही।
बॉम्बे वेलवेट के बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद फिल्मी जगत से लेकर सोशल साइट्स तक पर एक्सपेरिमेंटल वर्सेज कमर्शल सिनेमा की बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग कह रहे हैं कि बॉम्बे वेलवेट जैसी बकवास फिल्में और नहीं बननी चाहिए। टि्वटर पर अश्विनी वार्डे लिखते हैं, ‘तमाम सिलेब्स ने ट्विटर पर लिखा था कि बॉम्बे वेलवेट मास्टरपीस है। वे सब ध्यान रखें और अब लोगों को दोष ना दें कि वे बॉलिवुड को सीरियसली नहीं लेते।’
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इंडियन ऑडियंस को अच्छी फिल्में समझ नहीं आतीं। मसलन बॉलिवुड के इकलौते इंटरनैशनल स्टार इरफान खान कहते हैं, ‘हमें फिल्में बनाने की तमीज नहीं है। बॉलिवुड में अच्छी फिल्में बहुत कम बनती हैं। हम हमेशा बकवास फिल्में बनाकर उनसे 100-200 करोड़ कमाकर खुश हो जाते हैं। यही वजह है कि हॉलिवुड वाले आज भी फिल्मों के मामले में हमसे बहुत आगे हैं। हम पता नहीं कब उनकी बराबरी कर पाएंगे।’
वहीं, डायरेक्टर अनुराग बसु भी इस फिल्म को सपॉर्ट करते हैं, ‘मैं सहमत हूं कि बॉम्बे वेलवेट परफेक्ट नहीं है। मेरी भी सारी फिल्में परफेक्ट नहीं होतीं। हम दर्शकों की साइकॉलजी को समझने में नाकाम रहे हैं। हालांकि मैंने देखा है कि कई बकवास फिल्में 100 करोड़ कमा रही हैं।’
जाने-माने ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा कहते हैं, ‘बॉम्बे वेलवेट की असफलता की दो वजहें थीं। पहली यह फिल्म अच्छी नहीं बनी थी। दूसरी इसका बजट बहुत ज्यादा था। किसी फिल्म के साथ दो दुर्घटनाएं हो जाएं, तो दिक्कत तो होनी ही है। मेरे ख्याल से अगर आप कोई एक्सपेरिमेंटल सिनेमा बनाना चाहते हैं, तो आपको पहले बजट का भी ख्याल रखना चाहिए, ताकि अगर फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आए, तो आपको बहुत बड़ा झटका ना लगे।’
एक्सपेरिमेंटल सिनेमा के फ्यूचर के बारे में नाहटा कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि सिर्फ एक फिल्म के फ्लॉप होने से एक्सपेरिमेंटल सिनेमा को कोई झटका लगेगा। एक्सपेरिमेंटल सिनेमा बनाने वाले बहुत लोग हैं और वे अपना काम करते रहेंगे। हां, इतना जरूर है कि इससे एक्सपेरिमेंटल सिनेमा बनाने वालों को एक सबक जरूर मिलेगा। और वे फिल्में बनाते वक्त थोड़ी सावधानी बरतेंगे। एक्सपेरिमेंटल सिनेमा बनना अच्छी बात है, लेकिन कोई भी फिल्म बनाने के लिए बजट चाहिए और बिना फायदे की उम्मीद के कोई भी प्रड्यूसर पैसा लगाने को तैयार नहीं होगा।’