विवाह से सम्बंधित कुछ ज्योतिषीय बातें

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पंडित दयाननद शास्त्री
——जानिए की शादी तय होकर भी क्यों टूट जाती है?—–
(१)- यदि कुंडली में सातवें घर का स्वामी सप्तमांश कुंडली में किसी भी नीच ग्रह के साथ अशुभ भाव में बैठा हो तो शादी तय नहीं हो पाती है.
(२)- यदि दूसरे भाव का स्वामी अकेला सातवें घर में हो तथा शनि पांचवें अथवा दशम भाव में वक्री अथवा नीच राशि का हो तो शादी तय होकर भी टूट जाती है.
(३)- यदि जन्म समय में श्रवण नक्षत्र हो तथा कुंडली में कही भी मंगल एवं शनि का योग हो तो शादी तय होकर भी टूट जाती है.
(४) यदि मूल नक्षत्र में जन्म हो तथा गुरु सिंह राशि में हो तो भी शादी तय होकर टूट जाती है. किन्तु गुरु को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए.
(५) यदि जन्म नक्षत्र से सातवें, बारहवें, सत्रहवें, बाईसवें या सत्ताईसवें नक्षत्र में सूर्य हो तो भी विवाह तय होकर टूट जाता है.

====तलाक क्यों हो जाता है?- —

(१)- यदि कुंडली मांगलीक होगी तो विवाह होकर भी तलाक हो जाता है. किन्तु ध्यान रहे किसी भी हालत में सप्तमेश को वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए.
(२)- दूसरे भाव का स्वामी यदि नीचस्थ लग्नेश के साथ मंगल अथवा शनि से देखा जाता होगा तो तलाक हो जाएगा. किन्तु मंगल अथवा शनि को लग्नेश अथवा द्वितीयेश नहीं होना चाहिए.
(३) यदि जन्म कुंडली का सप्तमेश सप्तमांश कुंडली का अष्टमेश हो अथवा जन्म कुंडली का अष्टमेश सप्तमांश कुंडली का लग्नेश हो एवं दोनों कुंडली में लग्नेश एवं सप्तमेश अपने से आठवें घर के स्वामी से देखे जाते हो तो तलाक निश्चित होगा.
(४)- यदि पत्नी का जन्म नक्षत्र ध्रुव संज्ञक हो एवं पति का चर संज्ञक तो तलाक हो जाता है. किन्तु किसी का भी मृदु संज्ञक नक्षत्र नहीं होना चाहिए.
(५)- यदि अकेला राहू सातवें भाव में तथा अकेला शनि पांचवें भाव में बैठा हो तो तलाक हो जाता है. किन्तु ऐसी अवस्था में शनि को लग्नेश नहीं होना चाहिए. या लग्न में उच्च का गुरु नहीं होना चाहिए.

===पति पत्नी का चरित्र—–

(१)- यदि कुंडली में बारहवें शुक्र तथा तीसरे उच्च का चन्द्रमा हो तो चरित्र भ्रष्ट होता है.
(२)- यदि सातवें मंगल तथा शुक्र एवं पांचवें शनि हो तो चरित्र दोष होता है.
(३)- नवमेश नीच तथा लग्नेश छठे भाव में राहू युक्त हो तो निश्चित ही चरित्र दोष होता है.
(४)- आर्द्रा, विशाखा, शतभिषा अथवा भरनी नक्षत्र का जन्म हो तथा मंगल एवं शुक्र दोनों ही कन्या राशि में हो तो अवश्य ही पतित चरित्र होता है.
(५)- कन्या लग्न में लग्नेश यदि लग्न में ही हो तो पंच महापुरुष योग बनता है. किन्तु यदि इस बुध के साथ शुक्र एवं शनि हो तो नपुंसकत्व होता है.
(६)- यदि सातवें राहू हो तथा कर्क अथवा कुम्भ राशि का मंगल लग्न में हो तो या लग्न में शनि-मंगल एवं सातवें नीच का कोई भी ग्रह हो तो पति एवं पत्नी दोनों ही एक दूसरे को धोखा देने वाले होते है.

=====मधुर वैवाहिक जीवन—–
(१)- सप्तमेश का नवमेश से योग किसी भी केंद्र में हो तथा बुध, गुरु अथवा शुक्र में से कोई भी या सभी उच्च राशि गत हो तो दाम्पत्य जीवन बहुत ही मधुर होता है.
(२)- आगे पीछे ग्रहों से घिरे केंद्र में गज केसरी योग हो तथा आठवें कोई भी ग्रह नहीं हो तो वैवाहिक जीवन बहुत ही मधुर होता है.
(३)- भले ही कुंडली मांगलिक हो, यदि पंच महापुरुष योग बनाते हुए शुक्र अथवा गुरु से किसी कोण में सूर्य हो तो दाम्पत्य जीवन उच्च स्तरीय होता है.
(४)- भले ही कुंडली मांगलिक हो, यदि सप्तमेश उच्चस्थ होकर लग्नेश के साथ किसी केंद्र अथवा कोण में युति करे तो दाम्पत्य जीवन सुखी होता है.
(५)- भले गुरु नीच का सातवें भाव में तथा नीच का मंगल लग्न में हो, यदि छठे, आठवें तथा बारहवें कोई ग्रह न हो , तथा किसी भी ग्रह के द्वारा पंच महापुरुष योग बनता हो तो वैवाहिक जीवन सुखी होता है…
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——-विवाह नही होगा अगर—–

—–यदि सप्तमेश शुभ स्थान पर नही है।
—-यदि सप्तमेश छ: आठ या बारहवें स्थान पर अस्त होकर बैठा है।
—–यदि सप्तमेश नीच राशि में है।
—-यदि सप्तमेश बारहवें भाव में है,और लगनेश या राशिपति सप्तम में बैठा है।
—-जब चन्द्र शुक्र साथ हों,उनसे सप्तम में मंगल और शनि विराजमान हों।
—-जब शुक्र और मंगल दोनों सप्तम में हों।
—-जब शुक्र मंगल दोनो पंचम या नवें भाव में हों।
—-जब शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ हो और पंचम या नवें भाव में हो।
—-जब कभी शुक्र, बुध, शनि ये तीनो ही नीच हों।
—–जब पंचम में चन्द्र हो,सातवें या बारहवें भाव में दो या दो से अधिक पापग्रह हों।
–जब सूर्य स्पष्ट और सप्तम स्पष्ट बराबर का हो।

===विवाह में देरी—-

—सप्तम में बुध और शुक्र दोनो के होने पर विवाह वादे चलते रहते है,विवाह आधी उम्र में होता है।
—-चौथा या लगन भाव मंगल (बाल्यावस्था) से युक्त हो,सप्तम में शनि हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती है।
—-सप्तम में शनि और गुरु शादी देर से करवाते हैं।
—-चन्द्रमा से सप्तम में गुरु शादी देर से करवाता है,यही बात चन्द्रमा की राशि कर्क से भी माना जाता है।
—-सप्तम में त्रिक भाव का स्वामी हो,कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो,तो पुरुष विवाह में देरी होती है।
—जब सूर्य, मंगल,बुध लगन या राशिपति को देखता हो,और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो आध्यात्मिकता अधिक होने से विवाह में देरी होती है।
—लगन में सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या शुभ ग्रह योग कारक नही हों,परिवार भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो विवाह नही होता है,अगर हो भी जावे तो संतान नही होती है।
—-महिला की कुन्डली में सप्तमेश या सप्तम शनि से पीडित हो तो विवाह देर से होता है।
—-राहु की दशा में शादी हो,या राहु सप्तम को पीडित कर रहा हो,तो शादी होकर टूट जाती है,यह सब दिमागी भ्रम के कारण होता है।
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गर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो 28 साल की आयु तक विवाह न होना एक सामान्य बात है. घबराएं नहीं, 28 के बाद विवाह की प्रबल संभावना बनती है. बस आपको ध्यान यह रखना है कि किसी अन्य ग्रह के कारण उसमें विघ्न न आए.महिलाओं के लिए बृहस्पति पति, पुत्र तथा धन का प्रतिनिधि ग्रह है. इसलिए कन्याओं के विवाह पर गुरु की स्थिति का सबसे ज्यादा प्रभाव होता है.
बृहस्पति या गुरु ऐसा ग्रह है जो विवाह का कारक बनता है. इसलिए अगर गुरु को ठीक कर लिया जाए तो दूसरे ग्रहों के दोषों को कम कर विवाह का योग बनाया जा सकता है.इन ग्रहों के दोष के अलावा पूर्वजन्म के कारक और पितरों (माता-पिता औऱ पूर्वजों तक) का दोष भी विवाह में विलंब कराता है. ज्योतिषशास्त्र में अगर विलंब के कारण बताए गए हैं तो उसे दूर करने के उपाय भी हैं.
आज आपको कन्याओं के शीघ्र विवाह के उपाय बता रहे हैं. ग्रहों की स्थिति और पितरों का दोष——
जब दो कारक आपके विवाह में बाधक बन रहे हैं. दोनों की शांति कैसे करें-
पितरों का दोष शांत करने के घरेलू व मुफ्त के उपायः—-
—-माता का सम्मान करें. उनकी खूब सेवा करें.
—-यदि घर में भाभी या चाची हों तो उनका सम्मान करें. सेवा से उनको प्रसन्न रखें. गौरी कृपा से उन्हें वर मिला है. इसलिए उनका सम्मान कर आप गौरी का आशीर्वाद ले रही हैं.
—-घर की पहली रोटी गाय को खिलाएं.
—-सूर्यदेव को प्रणाम करें.
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जानिए की किस राशि विशेष की लड़की साबित होती हैं अधिक भाग्यशाली,किस राशि के लड़कों के लिए–

मेष- मेष राशि के पुरुष कड़े स्वभाव के क्रोधी और जिद्दी होते हैं. इसलिए बेहतर मेल बिठाने के लिए इस राशि के लड़कों के विवाह के लिए तुला राशि की लड़कियां सबसे अच्छी हो सकती हैं.
वृष- वृष राशि वाले पुरुषों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अच्छी होती है. इसलिए ये शांत स्वभाव के होते हैं. इन लड़कों के लिए वृश्चिक राशि की महिलाएं ज्यादा लकी होती हैं.
मिथुन- मिथुन राशि वाले पुरुषों का स्वभाव चंचल होता है. मिथुन राशि वाले यदि वृष राशि, तुला राशि और सिंह राशि की कन्या से शादी करें तो, वह उनके मन को शांत रखकर गलत रास्ते पर जाने से रोकती हैं और भाग्यशाली साबित होती हैं.
कर्क- कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा होता है. इसलिए इस राशि के लड़के मीठा बोलने वाले होते हैं. उनके लिए सिंह राशि, मेष राशि और धनु राशि की कन्याएं अच्छा साथ निभाती हैं और सौभाग्य लेकर आती हैं.
सिंह- इस राशि के पुरुष आत्मविश्वास से भरे लेकिन बड़े गुस्सैल होते हैं. कर्क राशि, मेष राशि, वृश्चिक राशि, धनु राशि और मीन राशि की लड़कियां इनके जीवन को व्यवस्थित कर सुख-शांति लाने में मददगार होती हैं इसलिए वे इऩके लिए ज्यादा लकी साबित हो सकती हैं.
कन्या- कन्या राशि वालों के लिए वृष राशि की लड़कियां शुभ होती हैं. कन्या राशि वालों को वृष राशि की लड़कियों से अच्छा सहयोग तो मिलता ही है और भावनात्मक रूप से जुड़ाव ज्यादा गहरा होता है.
तुला- तुला राशि वाले लड़के मेष राशि, मिथुन राशि, कन्या राशि और मकर राशि की लड़कियों से प्रभावित होते हैं. इस राशि के लड़के स्थिर मिजाज वाले होते हैं. मेष राशि की लड़कियां इनके साथ विशेष सहयोग करती हैं और भाग्योदय कराती हैं.
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों में आत्मविश्वास कुछ कम होता है क्योंकि उनकी कुंडली में चंद्रमा अशुभ होता है. वहीं वृष राशि वालों के लिए चंद्रमा शुभ फल देने वाला होता है इसलिए वृष राशि की कन्या वृश्चिक राशि, वालों का विश्वास बढ़ाकर लकी साबित होती हैं. इसके अलावा धनु राशि और मीन राशि भी उनके लिए शुभ होगा.
धनु- धनु राशि वालों का मिजाज भी मिथुन राशि वालों की तरह चंचल होता है. इसलिए धनु राशि वाले लड़कों के लिए सिंह राशि और मेष राशि की लड़कियां सबसे अच्छी साबित हो सकती हैं.
मकर- मकर राशि वाले पुरुष स्वभाव से कठोर होते हैं. उन्हें अगर भावनात्मक सहयोग की बड़ी जरूरत होती है. कर्क राशि, तुला राशि और वृष राशि की कन्या इस कमी को पूरा कर उनका भाग्योदय करा सकती है.
कुंभ- कुंभ राशि वालों को हर मोड़ पर अच्छे और सच्चे साथी की जरूरत होती है. उनके लिए सिंह राशि और वृष राशि की महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की दिलाने वाली साबित होती हैं. कुंभ राशि के लड़कों को यदि सिंह और वृष राशि वाली जीवनसंगिनी मिले तो भाग्योदय जल्दी होता है.
मीन- मीन राशि वालों के जीवन में मेष और वृश्चिक राशि की महिलाएं बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं. इसलिए मीन राशि के लड़कों की मेष और वृश्चिक राशि की लड़की के साथ मेल ज्यादा बेहतर और लकी साबित हो सकता है.