दिग्गी श्रीनिवास को घेर रहे शिव

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डाॅ. शिशिर उपाध्याय
भोपाल। व्यापमं घोटाले में सीधे आरोपों से आहत शिवराज सरकार अब दिग्विजयशासन काल में हुए कई मामलों कि पडताल में जुट गई है। दस वर्षो के कार्यकाल में हुई कई नियुक्तियां तथा भूमि आवंटन में पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्य सचिव तक जांच की आंच आने कि पूरी संभावना है। सुत्रों कि माने तो शिवराज सरकार के पास बहुत महत्व पूर्ण अहम दस्तावेज मौजूद है जिनमें पुख्ता प्रमाण दिग्विजय सिंह, श्रीनिवास तिवारी एवं कुछ पूर्व नौकरशाहों कि मुष्किलें बढ़ा सकते है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चैहान ने भी दिग्विजय सिंह पर सीधा हमला बोलते हुए आयकर विभाग के कुछ पूर्व छापों मे उनकी सनलिप्तता के कारण कटघरे में खडा किया है। सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी तथा पूर्व मुख्य सचिव के.एस. शर्मा के खिलाफ कानूनी मकडजाल का ताना-बाना तैयार कर रही है। सूत्रों की मानें तो व्यापमं घोटाले में दिग्गी राजा के आरोपों से तिलमिलाई सरकार ने अब दिग्गी शासनकाल की तिगडी को कानूनी दांव-पेंच में फंसाकर समझौते की राह का दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है। सूत्रों की माने तो जल्द ही अवैध नियुक्तियों, भूमि आवंटन में गडबडियों को लेकर एक दर्जन से अधिक मामलों में उक्त तीनों पूर्व पदाधिकारियों को कानूनी मकडजाल में फंसाने की तैयारी षुरू हो गई है। राज्य सरकार कांगे्रस कार्यकाल में हुई सारी गडबडियों का पता लगा रही है। नियुक्तियों और भूमि आवंटन के नियुक्त मामलों मे ंसरकार दोनों दिग्गज नेताओं के साथ कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी में है। अवैध नियुक्तियों और आरक्षण नियमों की अनेदखी करने के मामले में दोनों नेताओं ने एसटी/एससी एक्ट के तहत भी मुकदमा चलाने की तैयारी चल रही है।
अवैध नियुक्तियां
दिग्विजय शासन काल मे नगर निगम रीवां में 50 से अधिक नियुक्तियां की गई थी। बिना विज्ञापन और बिना पद स्वीकृत कराये इन नियुक्तियों में आरक्षण नियमों का भी पालन नहीं किया गया था। इनमें से अधिंकाश तत्कालीन स्पीकर श्रीनिवास तिवारी की सिफारिश पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा नोटशीट पर की गई है। निगम में 100 से ज्यादा अपात्र लोगों की पदोन्नति भी दी गई थी। संभागयुक्त ने सारे मामले की जांच की थी और गडबडियों की पुष्टि भी की थी। अब सरकार इस मामले की तत्कालीन फाइल दोबारा खोल रही है।

निजी स्कूल को सरकारी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तिवारी ने अपने गृह ग्राम तिवनी में एक निजी स्कूल कोशासनाधीन करवाया और सारे -नातेदार को सरकारी नौकरी पर रखवा दिया। सरकार इसे पद का दुरूपयोग मान रही है। रीवा में उच्च श्रेणी षिक्षक के पद पर पदस्थ प्रदीप मिश्रा को पहले विधानसभा में प्रतिनियुक्ति पर लिया गया। फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री की सिफारिष पर रीवा में ही उसे जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया। बाद में शिक्षा कर्मी भर्ती घोटाले में प्रदीप मिश्रा को सजा हुई और उसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। रीवा में अल्प आय वर्ग गृह निर्माण सहकारी समिति के प्लाट आवंटन के मामले मे पुनः जांच षुरू करा दी गई है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के दबाव में उनकी इच्छानुसार सैकड़ों अवैध कार्यो के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व मुख्य सचिव को कर्तव्य पालन में दोषी मानते हुए इन तीनों पर विभिन्न मामलों में एक दर्जन से अधिक मुकदमों को चलाने की तैयारी सरकार कर रही है। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि जब उनके खिलाफ कार्यवाही होगी। तभी इनके दिमाग से व्यापमं का भूत बाहर निकलेगा।