अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में टाइम्स ऑफ इंडिया बैन

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अलीगढ – अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जमीरुद्दीन शाह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को कैंपस में बैन कर दिया है। मौलाना आजाद लाइब्रेरी में अंडरग्रैजुएट गर्ल स्टूडेंट्स की एंट्री कम स्पेस का हवाला देकर रोकने वाले शाह पहले से ही विवादों के घेरे में हैं। गुरुवार को यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के शपथ ग्रहण समारोह में जमीरुद्दीन ने इसे लागू करने की घोषणा भी कर दी।
टीओआई बैन करने के मसले पर एएमयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर राहत अबरार ने शुक्रवार को कहा कि यह कदम यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स की मांग पर उठाया गया है। राहत ने कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया में यूनिवर्सिटी के बारे में छपी रिपोर्ट से एएमयू के स्टूडेंट्स नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अब कैंपस में टाइम्स ऑफ इंडिया की कॉपी किसी भी डिपार्टमेंट में नहीं आएगी।
लाइब्रेरी में लड़कियों पर पाबंदी मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूनिवसिटी के फरमान पर जवाब मांगा है। अबरार ने कहा कि हम इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले में तय तारीख पर जवाब देंगे। एमएयू के महिला कॉलेज में लड़कियां इलाहाबाद हाई कोर्ट की पहल से खुश हैं लेकिन उन्हें टाइम्स ऑफ इंडिया से किसी भी तरह के संवाद पर सतर्क कर दिया गया है। यहां की एक स्टूडेंट ने कहा कि यदि मौलाना आजाद लाइब्रेरी में एंट्री की उम्मीद बची है तो हमारे लिए यह बड़ी खबर है। यदि हमें एंट्री नहीं मिलती है तो हमारे कैंपस में उस लाइब्रेरी का ऑफिस होना चाहिए जिसके जरिए हम 24 घंटे के भीतर किताबें मंगा सकें। एमएमयू के फैकल्टी मेंबर्स भी नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर गर्ल स्टूडेंट्स की मांग से सहमति जता रहे हैं। एक फैकल्टी मेंबर ने कहा, ‘यह बेहद निराशाजनक है जिसने इस मुद्दे को उठाया उसे कैंपस से ही बेदखल करने का फरमान जारी कर दिया गया।’
एक और फैकल्टी मेंबर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘वीसी ने भले यह फैसला किया है लेकिन यहां के पूर्व स्टूडेंट्स और पैरंट्स इस कदम से खुश नहीं हैं। उम्मीद है कि नेगेटिव खबरों से चर्चा में आई एएमयू के लिए अच्छे नतीजे आ सकते हैं।’ एएमयू महिला कॉलेज में बीए थर्ड इयर की एक स्टूडेंट ने लाइब्रेरी में लड़कियों की एंट्री पर कोर्ट के सामने आने से खुशी जाहिर की। इस स्टूडेंट ने कहा कि अच्छा हुआ कि न्यूज लोगों के सामने आई लेकिन इससे हमारी परेशानियां भी बढ़ी हैं। एएमयू की इमेज जरूर खराब हुई है लेकिन कोर्ट की पहलकदमी से उम्मीद जगी है। यदि लाइब्रेरी में स्पेस की कमी है तो कम से कम हमें किताबें तो वहां से मिले।

एएमयू के पीआरओ ने कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट से यहां के स्टूडेंट्स खफा थे और उन्होंने ही कैंपस में इसे बैन करने की मांग की। स्टूडेंट्स की मांग पर यह फैसला लिया गया है।

हालांकि यूनिवर्सिटी की अंडरग्रैजुएट गर्ल स्टूडेंट्स की लंबे समय से मांग थी उन्हें मौलाना आजाद लाइब्रेरी में जाने की अनुमति मिले। एएमयू का महिला कॉलेज मौलाना आजाद लाइब्रेरी से 3 किलोमीटर दूर है। 10 नवंबर को एमएयू के वीसी ने कहा था कि यदि लाइब्रेरी में गर्ल स्टूडेंट्स को एंट्री मिल जाएगी तो वहां लड़कों की संख्या चार गुना बढ़ जाएगी। इसी खबर को टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रमुखता से छापा था। इसके बाद से वीसी टाइम्स ऑफ इंडिया से खफा थे और उन्होंने आखिरकार अखबार को ही कैंपस में बैन कर दिया।